आर्थिक सर्वेक्षण: निर्मला सीतारमण ने कहा, वीबी-जी राम जी अधिनियम 2047 के विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप
आर्थिक सर्वे में मनरेगा सुधार
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में मनरेगा की कमियां गिनाते हुए वीबी-जी-राम-जी अधिनियम लागू करने की बात कही गई। नया कानून ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 से जोड़ेगा।
नई दिल्ली। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में खामियां बताते हुए कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रगति के परिप्रेक्ष्य में योजना के पुनर्मूल्यांकन के बाद इसे व्यापक व्यावहारिकता प्रदान करने के लिए विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) अधिनियम लाया गया है जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2005 से मनरेगा को जब से लागू किया गया है, तब से इसमें दैनिक मजदूरी से ग्रामीण क्षेत्रों में आमदनी बढ़ाने और आधारभूत संरचना का सृजन करते हुए ग्रामीण परिवारों के अकुशल कार्य के लिए कम से कम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि समय के साथ-साथ आमदनी में वृद्धि, संपर्क का विस्तार, व्यापक रूप से डिजिटल पहुंच और आजीविका की उपलब्धता ने ग्रामीण रोजगार जरूरतों की प्रकृति में बदलाव आया है और यह योजना की उपलब्धियों और इसके डिजाइन तथा उद्देश्य के पुन: मूल्यांकन की जरूरतों पर बल देता है। वर्षों से प्रशासनिक और प्रौद्योगिकी सुधारों के परिणामस्वरूप इस योजना के कार्यान्वयन का विस्तार हुआ है और इसे उल्लेखनीय भागीदारी, पारदर्शिता और डिजिटल शासन के रूप में देखा जा सकता है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी वित्त वर्ष 2014-15 में 48 प्रतिशत थी वह वित्त वर्ष 2025-26 में 58.1 प्रतिशत हो गयी। आधार आधारित भुगतान प्रणाली को व्यापक रूप से अपनाया गया और इलेक्ट्रॉनिक दैनिक मजदूरी सबके लिए एक जैसी हो गयी। जीओ टैग संसाधनों के व्यापक विस्तार और पारिवारिक स्तर पर व्यक्तिगत संसाधनों में वृद्धि के साथ कार्यों की निगरानी में सुधार हुआ है। क्षेत्र स्तरीय कर्मचारियों ने सीमित संसाधनों में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहण किया।
इसके साथ मनरेगा के कार्यान्वयन के दौरान अनेक राज्यों में निगरानी से जमीनी स्तर पर कार्यों का न होना, कार्य की प्रगति के लिए हुए खर्चे का मिलान न होना, गहन श्रमिक कार्य में मशीनों का उपयोग और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली का लगातार उपयोग न करना जैसी खामियां उजागर हुई हैं।
मनरेगा की इन कमियों को देखते हुए सरकार ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 को लागू किया, जिसे वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 कहा जाता है। यह अधिनियम मनरेगा को व्यापक रूप से कानूनी वैधता प्रदान करता है, जो ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से जोडऩे का काम करता है और जवाबदेही और आय सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। वीबी जी राम जी अधिनियम, 2025 भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में निर्णायक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। नया अधिनियम ने पूर्व की कमियों को दूर करते हुए आधुनिक जिम्मेदार और अवसंरचना केंद्रित ढांचे का निर्माण किया है।
सर्वेक्षण के अनुसार इस अधिनियम की विशेषता है कि इसमें पारिश्रमिक का भुगतान साप्ताहिक रूप में होगा या कार्य के समाप्त होने या 15 दिन पर किया जाएगा। समय पर मजदूरी का इस तरह से भुगतान मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करता है और मनरेगा के तहत उनकी भागीदारी में जो कमी देखी गयी थी, वह दूर होगा।
मनरेगा कार्य सीमित संसाधनों के बावजूद क्षेत्रीय स्तर के कामगार की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देते हुए वीबी-जी-राम-जी प्रशासनिक व्यय की सीमा को कुल व्यय का छह प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत करके कामगारों की मदद करके प्रशिक्षण, पारिश्रमिक और तकनीकी क्षमताओं के बल पर विकसित भारत जी-राम-जी ग्रामीण प्रशासनिक क्षमता को बढ़ता है। यह बदलाव योजना में सुधार, कार्यान्वयन और सेवा में सभी स्तरों पर जिम्मेवारी को बढ़ावा देता है।
वीबी-जी-राम-जी के अंतर्गत योजनायें विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से स्थानीय वास्तविकताओं को आधार बनाकर तैयार की गयी हैं, जो स्थानीय रूप से राष्ट्रीय प्रणाली के तहत एकीकृत हैं, जैसे पीएम गति-शक्ति। इस अधिनियम में ग्राम पंचायत निरंतर केंद्रीय भूमिका का निर्वहन करेगा। यह कम से कम आधे कार्यों को लागू करता है। भागीदारी योजना ग्रामीण विकास को सुनिश्चित करते हुए समुदाय की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी है।
सर्वेक्षण के अनुसार सभी संपत्तियों का सृजन वीबी-जी-राम-जी के अंतर्गत किया जाएगा, जो एकीकृत और समन्वित विकास की रणनीति को सुनिश्चित करता है। इसमें स्थानीय कार्य को बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को रखा गया है। यह अधिनियम ग्रामीण आजीविका की सुविधा को मजबूत करता है और दीर्घकालिक एवं रणनीतिक अवसंरचना निर्माण को गति देता है।
यह अधिनियम पूरी प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी का विस्तार करता है। इसमें केंद्र सरकार को अधिकार है कि वह शिकायतों की जांच करे, मामलों में गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए धन आवंटन को रोक दे और उन उपायों को लागू करे, जो अधिनियम को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हैं। समय पर निगरानी से डिजिटल शासन मजबूत होगा। जीपीएस के माध्यम से कार्यों की निगरानी, एमआईएस डेसबोर्ड और साप्ताहिक आधार पर सूचना प्रदान की जायेगी। हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य है। केंद्र और राज्य की स्थायी समितियां इस पर निरंतर नजर रखेंगी।
इस अधिनियम की वित्तीय संरचना भविष्य के लिए कोष सुनिश्चित करता है, जबकि राज्यों पर अवांछित बोझ को कम करता है। आपदा के दौरान इन राज्यों को वित्तीय और अतिरिक्त सहायता भी मुहैया कराएगा और सतत वित्तीय ढांचा मुहैया कराएगा। मजबूत अंतरदृष्टि और जिम्मेवारी से भविष्य के जोखिम कम होंगे, जिससे सार्वजनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव हो पाएगा।

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