आबकारी सरचार्ज पेटे दो साल में 1380 करोड़ की भारी वसूली, खर्च की पारदर्शिता पर उठे सवाल
गौशालाओं के नाम पर मिलने वाली सहायता राशि को लेकर भी सवाल
राज्य सरकार की आबकारी नीति और सरचार्ज वसूली को लेकर विधानसभा में सवाल उठाए गए। दस्तावेजों के अनुसार शराब बिक्री पर लगाए गए सरचार्ज से सरकार को बीते दो वर्षों में 1380 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है, लेकिन इस राशि के उपयोग और लाभ को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं।
जयपुर। राज्य सरकार की आबकारी नीति और सरचार्ज वसूली को लेकर विधानसभा में सवाल उठाए गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार शराब बिक्री पर लगाए गए सरचार्ज से सरकार को बीते दो वर्षों में 1380 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है, लेकिन इस राशि के उपयोग और लाभ को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023-24 में आबकारी सरचार्ज से करीब 631 करोड़ रुपए और 2024-25 में लगभग 750 करोड़ रुपए की आय हुई। यानी कुल मिलाकर 1380 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की गई। इसके बावजूद यह साफ नहीं है कि यह पैसा आम जनता या सामाजिक कल्याण के लिए किस हद तक प्रभावी रूप से खर्च किया गया।
सरकार की ओर से बताया गया है कि सरचार्ज की राशि अलग से किसी विभाग को नहीं दी गई, बल्कि इसे सामान्य राजस्व में शामिल किया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि सरचार्ज लगाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था और इससे जुड़े सामाजिक दायित्वों का कितना पालन हुआ। इसी तरह गोशालाओं और पंजीकृत गौशालाओं के नाम पर मिलने वाली सहायता राशि को लेकर भी सवाल उठे हैं। दस्तावेज बताते हैं कि आबकारी सरचार्ज से प्राप्त राशि के मुकाबले गोशालाओं को दी गई सहायता 2338 करोड़ है, जो सरकार गौ-कल्याण को प्राथमिकता के तहत देने का दावा करती है।

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