पुस्तक में लिखे अंशों का लोकसभा में करना चाहता हूं उल्लेख : राहुल गांधी ने संसद में दिखाई प्रति, कहा- सरकार के अनुसार किताब नहीं छपी
सुरक्षा के सबसे गंभीर संकट में सरकार ने हाथ खड़े कर लिए
पुस्तक की प्रति दिखाते हुए सवाल किया कि किस आधार पर सरकार के वरिष्ठ मंत्री कह रहे हैं कि पुस्तक छपी ही नहीं है।
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि जिस पुस्तक के उद्धरण बोलने से उन्हें यह कहते हुए संसद में रोका जा रहा है कि यह पुस्तक छपी ही नहीं है, तो आज यह पुस्तक उनके हाथ में है। गांधी ने संसद भवन परिसर में कहा कि जिस पुस्तक में लिखे अंशों का वह लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उल्लेख करना चाहते हैं, सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि ये तथ्य अप्रमाणिक हैं और पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने पुस्तक की प्रति दिखाते हुए सवाल किया कि किस आधार पर सरकार के वरिष्ठ मंत्री कह रहे हैं कि पुस्तक छपी ही नहीं है।
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर भी इसे लेकर कहा कि यह किताब किसी विपक्षी नेता की नहीं है। यह किताब किसी विदेशी लेखक की नहीं है। यह किताब है देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की और हैरानी की बात यह है कि यह किताब कैबिनेट मंत्रियों के हिसाब से मौजूद ही नहीं है। गांधी ने कहा कि इस किताब में साफ़ लिखा है कि जब चीनी सेना हमारी सीमा में घुस आई थी, ऐसी समय में सेना प्रमुख को इंतजार करवाया और जब निर्णय लेने का समय आया, तो बस इतना कहा कि जो आपको उचित लगे, वो कीजिए। यानी देश की सुरक्षा के सबसे गंभीर संकट में सरकार ने हाथ खड़े कर लिए।
उन्होंने कहा कि जनरल नरवणे खुद लिखते हैं कि उस समय उन्हें लगा कि राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को अकेला छोड़ दिया। यही वह सच्चाई है, जिसे बोलने से उन्हें संसद में रोका जा रहा है। देश सवाल पूछ रहा है और सरकार जवाब देने से भाग रही है।

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