हरियाणा में लापता बच्चों के मामलों में सूचना मिलते ही दर्ज होगी एफआईआर : लागू नहीं होगी शर्त, समय की बर्बादी पीड़ित की सुरक्षा के लिए बन सकती है गंभीर खतरा

थाना प्रभारी को एफआईआर की प्रति सक्षम न्यायालय में भेजनी होगी

हरियाणा में लापता बच्चों के मामलों में सूचना मिलते ही दर्ज होगी एफआईआर : लागू नहीं होगी शर्त, समय की बर्बादी पीड़ित की सुरक्षा के लिए बन सकती है गंभीर खतरा
लापता बच्चों और मानव तस्करी के मामलों में सख्त कदम उठाए हैं। अब गुमशुदगी की सूचना मिलते ही बिना 24 घंटे इंतजार किए तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और खोज अभियान शुरू किया जाएगा। दो घंटे में सुराग न मिलने पर एफआईआर अदालत भेजी जाएगी। मानव तस्करी की आशंका पर मामला सीधे एएचटीयू को सौंपा जाएगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

पंचकूला। हरियाणा सरकार ने लापता बच्चों और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई को अधिक जवाबदेह और त्वरित बनाने के लिए राज्यभर में नए निर्देश लागू कर दिए हैं। अब किसी भी बच्चे या व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करनी होगी। इसके लिए न तो प्रारंभिक जांच का इंतजार किया जाएगा और न ही 24 घंटे बीतने की शर्त लागू होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में समय की बर्बादी पीड़ित की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। गृह विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार गुमशुदगी की सूचना मिलने के साथ ही पुलिस को खोज अभियान शुरू करना होगा। यदि 2 घंटे के भीतर लापता व्यक्ति का पता नहीं चलता है, तो संबंधित थाना प्रभारी को एफआईआर की प्रति सक्षम न्यायालय में भेजनी होगी, जबकि तलाश अभियान लगातार जारी रहेगा। सरकार ने शुरुआती घंटों को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस को किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

निर्देशों में कहा गया है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा अपहरण, मानव तस्करी और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से संबंधित प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। यदि जांच के दौरान मानव तस्करी की आशंका सामने आती है तो मामला तत्काल मानव तस्करी विरोधी इकाई (एएचटीयू) को सौंपा जाएगा। इसके लिए सामान्य जांच अवधि का इंतजार नहीं किया जाएगा। सरकार ने राज्य में एएचटीयू को पूरी तरह सक्रिय करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बरामद किए गए बच्चे या व्यक्ति को बिना कानूनी सत्यापन के परिवार के हवाले न किया जाए, विशेषकर उन मामलों में जहां मानव तस्करी की आशंका हो। पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित सत्यापन का भी उपयोग किया जाएगा।

जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों और किशोर न्याय समितियों को भी आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पीड़तिों का शीघ्र बचाव, संरक्षण और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। गृह विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

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