रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में भारत ने अमेरिका और चीन को पछाड़ा : भारत को 16वां स्थान, अमेरिका 66वें और चीन 68वें पर, इंडेक्स में सिंगापुर सबसे ऊपर
आर्थिक शक्ति होने से नहीं मिलती यह गारंटी
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में भारत ने 154 देशों में 16वां स्थान हासिल किया है। दिल्ली के वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन द्वारा जारी इस इंडेक्स में सिंगापुर शीर्ष पर रहा। रैंकिंग नागरिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी सहित 58 संकेतकों पर आधारित है। अमेरिका 66वें और चीन 68वें स्थान पर हैं।
नई दिल्ली। भारत ने 154 देशों के एक इंडेक्स में 16वां स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (आरएनआई) के तहत दी गई है। यह इंडेक्स बताता है कि देश अपने नागरिकों, पर्यावरण और दुनिया के प्रति कितनी जिम्मेदारी से काम करते हैं। इस इंडेक्स को दिल्ली के थिंक टैंक वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (डब्ल्यूआईएफ) ने लॉन्च किया है। इस इंडेक्स में सिंगापुर सबसे ऊपर है।
यह इंडेक्स वर्ल्ड बैंक, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से 2023 तक के उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल करता है। इसे तीन मुख्य बातों के आधार पर बनाया गया है। पहला, आंतरिक जिम्मेदारी जो नागरिकों की गरिमा, कल्याण और सशक्तीकरण के प्रति देश के कर्तव्यों को देखती है। दूसरा, पर्यावरण जिम्मेदारी जो पारिस्थितिकी संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता की जांच करती है। तीसरा, बाहरी जिम्मेदारी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के व्यवहार और योगदान पर केंद्रित है।
7 अलग-अलग पैमाने :
इन तीन मुख्य बातों को सात अलग-अलग पैमानों पर मापा जाता है। इनमें क्वालिटी ऑफ लाइफ, गवर्नेंस, सोशल जस्टिस और एम्पावरमेंट, इकोनॉमिक परफॉर्मेंस, पर्यावरण संरक्षण, शांति के प्रति प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध शामिल हैं। कुल 58 चुने हुए संकेतकों का इस्तेमाल करके अंतिम स्कोर और रैंकिंग तय की जाती है। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन ने एक बयान में कहा, यह इंडेक्स देशों को सिर्फ उनकी आर्थिक ताकत या भू-राजनीतिक प्रभाव से नहीं, बल्कि नागरिकों, पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति उनकी जिम्मेदारी के आधार पर आंकने के लिए एक नया वैश्विक ढांचा प्रदान करता है।
आर्थिक शक्ति होने से नहीं मिलती यह गारंटी :
इस इंडेक्स में चीन को 68वां और अमेरिका को 66वां स्थान मिला है। आरएनआई के नतीजों से पता चलता है कि ज्यादा जीडीपी या आर्थिक शक्ति होने से यह गारंटी नहीं मिलती कि देश जिम्मेदारी से काम करेगा। डब्ल्यूआईएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा, वास्तव में कई विकासशील देश पर्यावरण नैतिकता, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में अमीर देशों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यह विश्लेषण बताता है कि जिम्मेदारी और जवाबदेह संस्थानों की मौजूदगी, समान विकास और समावेशी शासन के बीच एक मजबूत संबंध है। रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि वैश्विक स्तर पर असमानताएं बढ़ी हैं। खासकर जलवायु जिम्मेदारी, न्यायिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के मामलों में ऐसा हुआ है। यह समकालीन राष्ट्रवाद के असमान नैतिक परिदृश्य को उजागर करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामूहिक रूप से ये इनसाइट इस बात की पुष्टि करते हैं कि राष्ट्रीय सफलता को केवल इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि राष्ट्र क्या हासिल करते हैं, बल्कि इस आधार पर भी मापा जाना चाहिए कि वे इसे कितनी जिम्मेदारी से हासिल करते हैं।

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