एनआईए ने आतंकी तहव्वुर से की तीन घंटे पूछताछ : मदद नहीं कर रहा राणा, हर सवाल का जवाब ‘पता नहीं, याद नहीं’

दो कैमरों की निगरानी में 12 अफसर उगलवा रहे राज

एनआईए ने आतंकी तहव्वुर से की तीन घंटे पूछताछ : मदद नहीं कर रहा राणा, हर सवाल का जवाब ‘पता नहीं, याद नहीं’

राणा का प्रत्यर्पण छह अमेरिकियों और जघन्य हमलों में मारे गए कई अन्य पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नई दिल्ली। एनआईए ने मुंबई 26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा से शुक्रवार को लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान एनआईए अधिकारियों को तहव्वुर ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, तहव्वुर राणा से एनआईए ने कस्टडी के पहले दिन महज तीन घंटों तक ही पूछताछ कर सकी। सुबह करीब 12 बजे ये पूछताछ शुरू हुई थी। राणा ने एनआईए अधिकारियों के सवाल को ज्यादातर जवाब ‘नहीं पता, या याद नहीं’ कहकर टाल दिया। एनआईए अधिकारियों को तहव्वुर के जवाब संतोषजनक नहीं लगे। पूछताछ में तहव्वुर ने बार-बार बीमारी का हवाला देकर पूछताछ से बचने की कोशिश की।

दो कैमरों की निगरानी में 12 अफसर उगलवा रहे राज
राणा से पूछताछ के लिए एनआईए के 12 अधिकारियों की टीम तैयार की गई है। जिस कमरे में राणा से पूछताछ की गई वहां दो कैमरे लगे हुए हैं। एनआईए राणा से जानना चाहती है कि उनका पाकिस्तानी हैंडलर कौन था? आतंकी साजिश में राणा को फंडिग कौन कर रहा था? स्लीपर सेल में कौन.कौन लोग हैं? राणा के बिजनेस पार्टनर का भी पता लगाने की कोशिशों में एनआईए है।

छह अमेरिकियों समेत 160 लोगों को न्याय मिलेगा : अमेरिका
अमेरिका ने 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में कनाडा के नागरिक एवं पाकिस्तान के मूल निवासी तहव्वुर हुसैन राणा की भूमिका का लेकर उसके प्रत्यर्पण को उन आतंकी हमलों में मारे गए छह अमेरिकियों सहित 160 से अधिक लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। अमेरिकी न्यायिक विभाग ने नई दिल्ली में राणा के सुरक्षित पहुंच जाने और न्यायिक कार्रवाई शुरू होने के बाद यहां जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि राणा को 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में उसकी भूमिका को लेकर भारतीय कानून के तहत तय 10 आपराधिक आरोपों में मुकदमों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित किया गया है। राणा का प्रत्यर्पण छह अमेरिकियों और जघन्य हमलों में मारे गए कई अन्य पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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