महादेव सट्टा ऐप मामला: सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण पर सियासत तेज, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
फर्जी बैंक खातों और विदेशी सिंडिकेट की जांच
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाए जाने के बाद प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और तत्कालीन कांग्रेस सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस ने भाजपा शासन के दौरान सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन और उसे कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों की जांच की मांग की है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताते हुए मंगलवार को कहा कि इससे कांग्रेस पार्टी, विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने महादेव सट्टा ऐप प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी। अब आरोपी को रायपुर लाकर अदालत में पेश किया जाएगा, जिसके बाद पूछताछ में इस अवैध कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
दीपक ने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके गृह जिले भिलाई से महादेव सट्टा ऐप का कारोबार शुरू हुआ और धीरे-धीरे दुबई तक फैल गया। उन्होंने कहा कि ऐप के प्रमोटरों की ओर से भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए देने का आरोप लगाया गया था, जिसकी जांच चल रही है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि सट्टेबाजी नेटवर्क से अर्जित धन किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाता था, इसमें कौन से अधिकारी शामिल थे और इस कारोबार को किस स्तर पर संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे चंद्रभूषण वर्मा का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में इन सभी कड़ियों का जवाब सामने आना चाहिए।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सौरभ चंद्राकर को भारत लाया जाना अच्छी बात है, लेकिन इस प्रकरण से जुड़े अनेक सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। शुक्ला ने सवाल उठाया कि देश में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद भी महादेव सट्टा ऐप का कारोबार धड़ल्ले से कैसे चलता रहा? उन्होंने मांग की कि इस कारोबार को किन-किन भाजपा के बड़े नेताओं का संरक्षण मिला हुआ था, इसका भी खुलासा किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि महादेव ऐप के तार पीएमओ तक जुड़े होने की बातें सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के दौरान इन आरोपों की भी जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पूरे सट्टेबाजी नेटवर्क को किन लोगों का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। उल्लेखनीय है कि करीब छह हजार करोड़ रुपए के कथित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच सीबीआई कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस प्रकरण की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच एजेंसी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में शामिल रहा है।
इस नेटवर्क के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल और ताश सहित विभिन्न खेलों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित किए जाने का आरोप है। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल और फ्रेंचाइजी का व्यापक नेटवर्क तैयार किया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सट्टेबाजी से अर्जित रकम को अनेक बैंक खातों में स्थानांतरित करने के बाद हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था। आरोप है कि इस धनराशि का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण राशि के रूप में भी दिया जाता था।
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ सीबीआई के दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी संबंधित धनशोधन मामले में उसके विरुद्ध अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुका है। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद चंद्राकर को कल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया। जांच एजेंसी अब उसे रायपुर लाकर विशेष अदालत में पेश करेगी।
महादेव सट्टा ऐप प्रकरण में चंद्राकर के भारत लाए जाने से जांच के अगले चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उसकी पूछताछ से वित्तीय लेनदेन, कथित राजनीतिक संरक्षण और नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, दोनों राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और इन्हें अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

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