ईरान की 14 सूत्री शांति योजना की समीक्षा करेंगे ट्रंप : अस्वीकार होने का दिया संकेत, कहा- अभी तक नहीं चुकाई पर्याप्त कीमत
हमले फिर से शुरू करने की संभावना से इनकार नहीं किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह ईरान के 14-सूत्री शांति प्रस्ताव की जल्द समीक्षा करेंगे, लेकिन इसे स्वीकार्य मानने की संभावना कम है। ट्रम्प ने ईरान पर हमले की संभावना भी खारिज नहीं की। प्रस्ताव में हर्जाना, प्रतिबंध हटाना, अमेरिकी सैन्य वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य में नए समुद्री तंत्र की मांग शामिल है। बताई जा रही है
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह जल्द ही ईरान द्वारा अमेरिका को भेजे गए 14 सूत्री शांति प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे और कहा कि इसके स्वीकार्य होने की संभावना नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर कहा, मैं जल्द ही ईरान द्वारा अमेरिका को भेजी गई योजना की समीक्षा करूंगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगी, क्योंकि उन्होंने पिछले 47 वर्षों में मानवता एवं विश्व के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।
ट्रंप ने ईरान पर हमले फिर से शुरू करने की संभावना से इनकार नहीं किया। फ्लोरिडा में पत्रकारों से इस मामले पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, अगर वे दुर्व्यवहार करते हैं, अगर वे कुछ गलत करते हैं तो यह एक संभावना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन अभी हम देखेंगे। अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के लिए ईरान की शांति योजना में 14 बिंदु शामिल हैं और इसमें तेहरान को हर्जाना देना और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन के लिए एक नया तंत्र बनाना शामिल है।
इससे पहले आईआरएनए ने खबर दी थी कि 30 अप्रैल को ईरान ने अपनी नई शांति योजना का मसौदा पाकिस्तान को सौंप दिया था। प्रकाशन के अनुसार, अमेरिका ने दो महीने के युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है लेकिन ईरान का कहना है कि मुद्दों का समाधान 30 दिनों के भीतर होना चाहिए, जिससे युद्धविराम के नवीनीकरण के बजाय युद्ध की पूर्ण समाप्ति पर ध्यान केंद्रित हो गया है। तेहरान की प्रमुख मांगों में हर्जाना, सैन्य आक्रामकता की पुनरावृत्ति न होने की गारंटी, ईरानी परिधि से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की समाप्ति और वहां जहाजों के आवागमन के लिए एक नया तंत्र स्थापित करना शामिल है। ईरान विदेशों में स्थित अपनी संपत्तियों को मुक्त करने और प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग कर रहा है।

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