जाने राज काज में क्या हैं खास
परेशानी हरिराम नाई से
चर्चा में नए समीकरण
समीकरण बनते-बिगड़ते हैं, तो उसकी चर्चा हुए बिना नहीं रहती। सूबे में इन दिनों हाथ वाले भाई लोगों में भी नए समीकरण को लेकर काफी चर्चा है। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वाले ठिकाने पर आने वाले वर्कर्स में नई तिगड़ी को लेकर चर्चा हुए बिना नहीं रहती। तिगड़ी भी और किसी की नहीं बल्कि बॉर्डर डि्ट्रिरक्ट के साथ ही शेखावाटी वाले भाई साहब और नवाबों के शहर से ताल्लुक रखने वाले लीडर की है। ठिकाने पर सालों से आने वाले बुजुर्गवार भाई साहब की मानें, तो तिगड़ी भी सूर्यनगरी में सेंधमारी कर मैसेज देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अब भाई लोगों को कौन समझाए कि ठिकाने पर कहानी तो कुछ और होती है, और सुनाई कुछ और जाती है।
परेशानी हरिराम नाई से
सूबे में इन दिनों हाथ वाले कुछ भाई लोग हरिराम नाई से काफी परेशान हैं। हरिराम भी शोले फिल्म वाला नहीं बल्कि संगठन का मजबूत खंभा है, इसलिए उससे कोई बात भी छुपी नहीं रहती। मेष राशि वाले हरिराम के कान और नजरें भी बहुत तेज हैं तथा सूंघने की क्षमता भी लाजवाब। संगठन वाले नेताजी अपना मुंह खोलने से पहले उससे सावधानी तो बरतते हैं, लेकिन कभी-कभी चूक भी हो जाती है। इस हरिराम की वजह से इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने की पल-पल की खबरें लाग लपेट के साथ सिविल लाइन्स में बने बंगले तक पहुंचने में कोई चूक नहीं होती। अब संगठन के भाई लोगों को ऐसे वीरू और जय की तलाश है, जो हरिराम नाई को सबक सीखा सके।
अब नजरें आरयू की तरफ
सूबे के शिक्षाविद्धों की नजरें अब आजादी के साल बने शिक्षा के सबसे बड़े मंदिर की तरफ टिकी हुई हैं। टिके भी क्यों नहीं भरतपुर, जोधपुर, बीकानेर और अलवर कुलगुरु पर राज की टेढ़ी नजरें जो हो चुकी है। सूबे की सबसे बड़ी पंचायत के दो सदस्यों की आरयू की कुलगुरु मेम को लेकर पहले से ही आंखें लाल हैं। वैसे मेम को आधी आबादी की आयोग की चैयरपर्सन मराठी ताई से उम्मीद हैं, लेकिन उन पर भी दोनों मेंबर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।
एक जुमला यह भी
सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि राहत को लेकर है। राहत भी बाढ़ से प्रभावित लोगों से ताल्लुक रखती है। जुमला है कि मीनेश वंशज डॉक्टर साहब और अटारी वाले भाई साहब एक साथ हवा में उड़ने के बाद भी 193 में से केवल 26 को ही राहत देने के पीछे का कारण राज को बदनाम करने की मंसा तो नही है। अब इस राज को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Comment List