तुर्की के माउंट अरारात के सेंपल से खुलेगा राज

कुछ जगहों पर कॉरिडोर जैसे पैटर्न भी बताए

तुर्की के माउंट अरारात के सेंपल से खुलेगा राज
एक 515 फीट लंबी संरचना, 1000 मिट्टी सैंपल और जमीन के नीचे दिखते अजीब पैटर्न, माउंट अरारात की यह जगह एक बार फिर चर्चा में है। तुर्की के माउंट अरारात के पास मौजूद दुरुपिनार फॉर्मेशन को लंबे समय से नोआ की नाव से जोड़ा जाता रहा है।

एक 515 फीट लंबी संरचना, 1000 मिट्टी सैंपल और जमीन के नीचे दिखते अजीब पैटर्न, माउंट अरारात की यह जगह एक बार फिर चर्चा में है। तुर्की के माउंट अरारात के पास मौजूद दुरुपिनार फॉर्मेशन को लंबे समय से नोआ की नाव से जोड़ा जाता रहा है, 2026 में शिवास जुम्हूरियत यूनिवर्सिटी की टीम ने यहां बड़े स्तर पर रिसर्च की, टीम ने करीब 1000 मिट्टी के सैंपल लिए और जमीन के अंदर की स्थिति देखने के लिए रडार का इस्तेमाल किया, शुरुआती जांच में जमीन के नीचे कुछ अलग तरह के पैटर्न मिले हैं, यह रिसर्च तुर्की के आगरी प्रांत के डोगुबायाजित इलाके में हुई, इसमें 5 देशों के करीब 20 वैज्ञानिक और स्टूडेंट शामिल थे, टीम ने करीब 150 जगहों से मिट्टी के सैंपल लिए, रडार से मिली जानकारी के आधार पर कुछ खास जगहों को जांच के लिए चुना गया, हालांकि, अभी तक ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं मिला है, जिससे कहा जा सके कि यहां नोआ की नाव के अवशेष हैं, इसके लिए सैंपल की आगे जांच जरूरी है।

2026 की रिसर्च में ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार यानी जीपीआर का इस्तेमाल किया गया, यह रडार जमीन के अंदर की परतों और वहां मौजूद चीजों के संकेत देता है, शुरुआती डेटा में कुछ जगहों पर सीधी लाइन और राइट एंगल जैसे आकार दिखे हैं, कुछ जगहों पर कॉरिडोर जैसे पैटर्न भी बताए गए हैं, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि ये आकार किस वजह से बने हैं। रिसर्च टीम ने करीब 1000 मिट्टी के सैंपल लिए हैं, कुछ जगहों से जमीन के अंदर के कोर सैंपल भी निकाले गए, अब इन सैंपल की लैब में जांच होगी, इसमें मिट्टी की बनावट और उसमें मौजूद अलग अलग चीजों को देखा जाएगा, इस संरचना के अंदर की मिट्टी में आसपास की मिट्टी के मुकाबले करीब 40 फीसदी ज्यादा कार्बन मिला है, लेकिन ज्यादा कार्बन मिलने का यह मतलब नहीं है कि वहां नाव की लकड़ी मिली है, कार्बन कई तरह के ऑर्गेनिक मैटेरियल से भी आ सकता है, इसलिए इस नतीजे को समझने के लिए और जांच की जरूरत है। दुरुपिनार फॉर्मेशन करीब 157 मीटर यानी 515 फीट लंबी हैण् ऊपर से देखने पर इसका आकार नाव जैसा लगता है, इसे 1959 में तुर्की के कैप्टन इलहान दुरुपिनार ने हवाई तस्वीरों में देखा था, इसके आकार और माउंट अरारात से जुड़ी पुरानी धार्मिक मान्यताओं की वजह से इसे नोआ की नाव से जोड़ा जाने लगा।

हालांकि, वैज्ञानिकों के बीच इसे लेकर एक राय नहीं है, कुछ लोग इसे किसी पुरानी नाव की जगह प्राकृतिक रूप से बनी भूगर्भीय संरचना मानते हैं, यानी जमीन और मिट्टी की प्राकृतिक हलचल से भी ऐसा आकार बन सकता है।

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