आरएएस-2024 साक्षात्कार : फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों को लेकर आरपीएससी सतर्क, हो रही सूक्ष्म जांच

415 अभ्यर्थियों को आजीवन और 109 को आयोग की परीक्षाओं से किया गया डिबार

आरएएस-2024 साक्षात्कार : फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों को लेकर आरपीएससी सतर्क, हो रही सूक्ष्म जांच

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आरएएस भर्ती परीक्षा-2024 की साक्षात्कार प्रक्रिया में भी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों के उपयोग को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आयोग आरएएस भर्ती-2023 की तरह ही आरएएस भर्ती-2024 के साक्षात्कार में शामिल होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों की दिव्यांगता प्रतिशत व प्रकार की पुष्टि के लिए पुन: मेडिकल बोर्ड के माध्यम से नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सघन जांच करवा रहा है।

अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आरएएस भर्ती परीक्षा-2024 की साक्षात्कार प्रक्रिया में भी फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों के उपयोग को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आयोग आरएएस भर्ती-2023 की तरह ही आरएएस भर्ती-2024 के साक्षात्कार में शामिल होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों की दिव्यांगता प्रतिशत व प्रकार की पुष्टि के लिए पुन: मेडिकल बोर्ड के माध्यम से नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सघन जांच करवा रहा है। जांच के दौरान विशेष रूप से लो-विजन और हार्ड हियरिंग के मामलों में कई विसंगतियां भी प्रकट हो रही हैं। आयोग सचिव ने बताया कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 24 नवम्बर 2025 को जारी सर्कुलर के अनुसार लाभ वितरण से पहले सक्रिय यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड और विकलांगता प्रमाण-पत्रों का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम प्रमाण-पत्रों के दुरुपयोग से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

इसके साथ ही कार्मिक विभाग के 28 अगस्त के परिपत्र के क्रम में आयोग सतर्कता बरतते हुए दिव्यांगता प्रतिशत और प्रकार की मेडिकल बोर्ड के माध्यम से जांच करवाकर पुष्टि कर रहा है। इसके तहत वह अभ्यर्थी जिनके पास यूडीआईडी प्रारम्भ होने से पूर्व के प्रमाण-पत्र हैं, उनका भी पुन: सत्यापन के बाद पोर्टल के माध्यम से जारी प्रमाण-पत्र लिया जा रहा है। सख्ती इसलिए बरती जा रही है क्योंकि दिव्यांगजन के लिए आरक्षण का प्रावधान उनकी वास्तविक स्थिति और चुनौतियों को देखते हुए किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर नियुक्ति प्राप्त करता है, तो यह न केवल वास्तविक दिव्यांगजन के अधिकारों का हनन है, बल्कि एक आपराधिक कृत्य भी है।

फर्जी दस्तावेज या गलत तथ्य दिए तो होंगे डिबार
आयोग की ओर से फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र, छद्म डिग्री व दस्तावेजों तथा जालसाजी एवं अन्य प्रकरणों में अभी तक 524 संदिग्ध और अपात्र अभ्यर्थियों को आयोग की भर्ती परीक्षाओं से डिबार किया जा चुका है। इनमें से 415 अभ्यर्थियों को आजीवन आयोग की भर्ती परीक्षाओं से डिबार किया गया है। शेष 109 अभ्यर्थियों को एक से पांच वर्ष तक की अवधि के लिए डिबार किया गया है।

दुरुपयोग पर सख्त कानूनी कार्रवाई और दंड
दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 89 और 91 के तहत धोखाधड़ी वाले कार्यों के लिए सख्त दंड का प्रावधान है। धोखाधड़ी/नियमों का उल्लंघन (धारा 89) के तहत पहली बार उल्लंघन पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना और बाद के उल्लंघनों के लिए 50,000 रुपए तक का जुर्माना। इसी तरह धोखाधड़ी से लाभ प्राप्त करने का प्रयास (धारा 91) के तहत दो साल तक की कैद और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने की सजा।  

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