प्रसव पीड़ा से ज्यादा सरकारी अनदेखी मार रही, प्रदेश में हर माह दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा

अस्पतालों में मेडिकल ऑडिट की भारी कमी

प्रसव पीड़ा से ज्यादा सरकारी अनदेखी मार रही, प्रदेश में हर माह दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा
प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व के सरकारी दावे कागजी साबित। जमीनी हकीकत यह है कि राज्य में प्रसव के दौरान होने वाली कुल मातृ मौतों में से 46.2% मामलों में मौत का कारण ही स्पष्ट नहीं। अस्पतालों में प्रसव के बाद होने वाले अनिवार्य मेडिकल ऑडिट की भारी लापरवाही के चलते इन मौतों की वास्तविक वजह फाइलों में दबी रह जाती है।

भीलवाड़ा। प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व के सरकारी दावे कागजी साबित हो रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि राज्य में प्रसव के दौरान होने वाली कुल मातृ मौतों में से 46.2% मामलों में मौत का कारण ही स्पष्ट नहीं है। अस्पतालों में प्रसव के बाद होने वाले अनिवार्य मेडिकल ऑडिट की भारी लापरवाही के चलते इन मौतों की वास्तविक वजह फाइलों में दबी रह जाती है। दैनिक नवज्योति की पड़ताल में सामने आया है कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की ट्रैकिंग में भारी लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गर्भवती महिलाएं दम तोड़ रही हैं। प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की मौतों का ग्राफ डराने वाली रफ्तार से भाग रहा है। अप्रैल के मुकाबले मई महीने में यह आंकड़ा करीब दोगुना हो चुका है। मई माह में कुल 72 रिपोर्टेड मौतें हुईं, जबकि अनुमानित आंकड़ा 79 का था। वहीं, अप्रैल में 39 मौतें रिपोर्ट की गई थीं। सबसे ज्यादा मौतें जोधपुर (11), भीलवाड़ा (7) और कोटा जिले में (7) दर्ज की गई हैं।

गर्भवती महिलाओं का दुश्मन: पीपीएच और हाई बीपी
वित्तीय वर्ष में दर्ज कुल 685 मौतों के विश्लेषण से पता चलता है कि मेडिकल लापरवाही और समय पर इलाज न मिलना महिलाओं के लिए काल बन रहा है। 317 महिलाओं (46.2%) की मौत किस वजह से हुई, इसका रिकॉर्ड ही नहीं है। प्रसव के बाद ज्यादा खून बहने से 120 महिलाओं (17.5%) की जान गई। वहीं गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के कारण 108 महिलाओं (15.8%) ने दम तोड़ दिया। हार्ट अटैक से 29 (4.2%) और गंभीर इन्फेक्शन (सेप्सिस) से 28 महिलाओं (4.1%) की मौत हुई है।

पंजीकरण में हनुमानगढ़ और झुंझुनं जिला सबसे फिसड्डी
एंटीनेटल केयर (एएनसी) रजिस्ट्रेशन में राज्य का औसत 88.67% रहा है, जहां कुल 16.97 लाख गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण हुआ। हालांकि, इसमें क्षेत्रीय असमानता साफ दिखती है। शीर्ष 5 जिलों ने 99% से अधिक पंजीकरण का शानदार रिकॉर्ड बनाया। वहीं सबसे पिछड़े जिले में हनुमानगढ़ (66.6%) और झुंझुनू (67.8%) राज्य में सबसे निचले पायदान पर रहे, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद कमजोर है।

इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर की विशेष टीम और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने भीलवाड़ा आकर विस्तृत जांच की है। आज मैंने स्वयं जिला कलेक्टर के साथ हर पहलू की बारीकी से समीक्षा की है और प्रशासन से कुछ जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। यह स्पष्ट कर दूं कि जिस ऑपरेशन थिएटर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसे पहले ही बंद कर दिया गया था और वहां कोई डिलीवरी नहीं हुई थी। 
-गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा मंत्री राजस्थान 

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