मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में विधानसभा के 75वें वर्ष का अमृत महोत्सव शुरू, सांसद और मंत्री मौजूद
वरिष्ठ विधायक आगामी सत्रों में सदन में बने ऐतिहासिक कानूनों पर करेंगे चर्चा
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को विधानसभा में अमृत महोत्सव का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि रहे, जबकि समापन समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित अनेक विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पहली से लेकर 16वीं विधानसभा तक के पूर्व एवं वर्तमान सदस्य मौजूद रहे। इसमें लोकतंत्र की ऐतिहासिक यात्रा, विधायी परंपराओं, सदन की गरिमा, डिजिटल रूपांतरण तथा लोकतांत्रिक चुनौतियों पर मंथन हो रहा है। विभिन्न सत्रों में अलग-अलग कालखंडों में पारित 23 महत्वपूर्ण एवं जनहितैषी कानूनों पर चर्चा होगी। इनमें भूमि सुधार, जमींदारी उन्मूलन, पंचायत राज, लोकायुक्त, कृषि सुधार, शिक्षा, सूचना का अधिकार, वित्तीय उत्तरदायित्व, लोक सेवाओं की गारंटी, गिग वर्कर्स कल्याण, कोचिंग सेंटर विनियमन तथा विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं। इन विषयों पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे।
अमृत महोत्सव के अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों, छह या उससे अधिक बार विधायक रहे पूर्व जनप्रतिनिधियों तथा वर्तमान वरिष्ठ विधायकों का सम्मान भी किया जाएगा। सम्मानित होने वालों में पूर्व अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत, सुमित्रा सिंह, दीपेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चंद मेघवाल और डॉ. सी.पी. जोशी सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हैं। वहीं वर्तमान विधायकों में कालीचरण सराफ, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, मदन दिलावर और अन्य वरिष्ठ विधायकों को भी सम्मानित किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज उन लोगों को याद करने का समय है, जो आज इस सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन जनता के लिए काम कर रहे हैं। आज का दिन मेरे लिए भी भावुक क्षण है। मैं यहां अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि इसी सदन से सीखकर और अनुभव लेकर आगे बढ़ा हूं। मुझे अध्यक्षों का मार्गदर्शन मिला। उस समय के अध्यक्ष भी आज यहां मौजूद हैं। लंबे समय तक उनके साथ चर्चा करने का अवसर मिला, जिसका लाभ मुझे आज भी मिल रहा है। मैं छात्र राजनीति से राजनीति में आया। यहां अंतिम पंक्ति में बैठकर बड़े नेताओं की बातें सुना करता था। प्रदेश की हमेशा देश-दुनिया में अलग पहचान रही है।
उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमारा जन्म इस प्रदेश में हुआ। विधानसभा का भी गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां से कई नेता देश के उच्च पदों तक पहुंचे। भैरों सिंह शेखावत यहां सदस्य रहे, मुख्यमंत्री बने और बाद में उपराष्ट्रपति भी बने। आज भी संसद में कई लोग उन्हें याद करते हैं। उन्होंने लंबे समय तक यहां बैठकर अनुभव प्राप्त किया। जगदीप धनखड़ भी यहां सदस्य रहे। पूर्व अध्यक्षों ने लोकतंत्र की परंपराओं को आगे बढ़ाया। हमारे संस्कार हमेशा लोकतांत्रिक रहे हैं। यहां संवाद, सहमति और असहमति की स्वस्थ परंपरा रही है। लोकसभा में 543 सदस्य हैं। वहां कई बार बोलने का अवसर भी नहीं मिलता था, लेकिन मैं बैठकर सीखता था। प्रथम पाठशाला हमेशा सबसे महत्वपूर्ण होती है।उन्होंने कहा कि जब हम नए-नए आए थे तो आसन के सामने खड़े होते ही बैठ जाते थे। सात साल हो गए, कितने ही व्यवधान हुए, लेकिन मैंने कभी आसन पर खड़े होकर प्रतिक्रिया नहीं दी। आसन सबका होता है। सदन में तनाव और उत्तेजना हो सकती है, लेकिन उसका असर आसन पर नहीं दिखना चाहिए। मुझे एक कार्यकर्ता ने कहा था कि चेहरे पर कभी तनाव नहीं दिखना चाहिए। चाहे कितनी भी भीड़ हो, परिस्थितियां कैसी भी हों, सहज रहना चाहिए, चाहे सांसद हों या कार्यकर्ता।
उन्होंने कहा कि हंगामा और केवल प्रतिरोध करने से कोई नेता नहीं बनता। व्यक्ति रहे या न रहे, लेकिन उसके विचार, संवाद और बहस लंबे समय तक पढ़े और याद किए जाते हैं। तर्क, तथ्य और सार्थक चर्चा इतिहास में हमेशा जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि राव राजेंद्र सिंह जब यहां बोलते हैं तो सभी उन्हें सुनते हैं। मैं यहां से सीखकर संसद पहुंचा और वहां भी सात वर्षों में लगातार सीखता रहा हूं। आजकल यह प्रवृत्ति हो गई है कि लोग बोलते हैं और चले जाते हैं, जबकि जितना अधिक सुनेंगे, उतना ही अधिक सीखेंगे। विधानसभा ऐसी पाठशाला है, जिसका लाभ जीवनभर मिलता है। मंत्री भी सवालों के जितने सटीक जवाब देंगे, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। देश के बड़े नेता इन्हीं सदनों में बोलते-बोलते बने हैं। सार्थक चर्चा और संवाद होना चाहिए। सरकारों को भी चुनौतियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझना है तो विधानसभा सबसे बड़ा मंच है। आलोचना यदि तर्कपूर्ण होगी तो सरकार को भी उस पर विचार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बेहतर सरकार चलाने के लिए यदि कोई सबसे महत्वपूर्ण मंच है तो वह विधानसभा है। समय के साथ परिवर्तन हुआ है। जनता अब उत्तरदायी और पारदर्शी शासन चाहती है। ऐसा होगा तभी जनप्रतिनिधि सफल साबित होगा। डिजिटल माध्यम से बड़े नेताओं की बहसों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनसे सीख सके। आज कई ऐसे नेता हैं जो अब सदस्य नहीं हैं, लेकिन जनता के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
जनता हमारे काम और फैसलों को देखती है, उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना चाहिए : भजनलाल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हम सभी ने राजस्थान की प्रगति में अपना योगदान दिया है। जब से विधानसभा बनी है, तब से रामकिशन, तिवारी, शेखावत सहित सभी वरिष्ठजनों ने प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदेश के सामने समय-समय पर अनेक चुनौतियां आईं। अकाल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई योजनाएं बनीं। अंत्योदय जैसी योजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में जनसेवा का कार्य हुआ। परिस्थितियां बदलती रहती हैं। राजस्थान के लोगों ने उपराष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे पदों पर पहुंचकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की यह यात्रा गौरवशाली रही है। प्रदेश की आठ करोड़ जनता हमारी ओर देखती है। उनकी अपेक्षाओं पर हमें खरा उतरना है, ताकि प्रदेश प्रगति की ओर बढ़े। हमें अपनी भूमिका तय करनी होगी और जनता के हित में कार्य करना होगा। वर्ष 1952 में 160 जनप्रतिनिधियों ने अनेक चुनौतियों के बीच काम किया। चुनौतियां हमेशा रहती हैं, लेकिन जनता के हित में सभी को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। मतभेद भले ही हों, लेकिन लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता कभी नहीं बदलनी चाहिए।
आने वाली पीढ़ी हमसे सीखती है। हमें ऐसे कार्य और ऐसे विषय छोड़कर जाने चाहिए, जिनके लिए आने वाली पीढ़ियां हमें याद रखें। विधानसभा अध्यक्ष ऐसे ऐतिहासिक विषयों का संकलन भी करें, ताकि उनसे भविष्य की पीढ़ियां सीख सकें। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा आज नवाचारों के लिए देशभर में जानी जाने लगी है। जनता हमारे काम, समर्पण और फैसलों को देखती है। हमें जनता के विश्वास पर खरा उतरना चाहिए। हमारा ध्येय 'सबका साथ, सबका विकास' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सभी को यहां गंभीर विचार-विमर्श करना चाहिए। साथ ही विधायकी के अनुभव और कार्यशैली को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

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