70 हजार चालान काटे, फिर भी नशे में ड्राइविंग पर लगाम नहीं; 507 पकड़े, वसूली में फिसड्डी
नो पार्किंग में 15,963 और बिना हेलमेट के 16,915 चालान
जयपुर। राजधानी में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ट्रैफिक पुलिस ने सितंबर में जमकर कार्रवाई की, लेकिन नशे में वाहन चलाने और नियमों की पालना कराने की चुनौती बरकरार रही। एक से 30 सितंबर तक जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने 70,282 चालान किए। इसके बावजूद महीने में केवल 2,797 चालानों का निस्तारण हुआ और 30 लाख 88 हजार 800 रुपए का राजस्व ही वसूला जा सका। आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा कार्रवाई बिना हेलमेट वाहन चलाने पर हुई। इस श्रेणी में 16,915 चालान किए गए, जबकि नो पार्किंग में 15,963 कार्रवाई हुईं।
निस्तारण और वसूली में बड़ा अंतर :
सितंबर में किए गए कुल चालानों के मुकाबले निस्तारित चालानों की संख्या करीब चार प्रतिशत रही। यानी 70 हजार से अधिक चालान होने के बावजूद बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण नहीं हो सका। वहीं, 30.88 लाख रुपए का राजस्व संग्रह चालानों की कुल संख्या के मुकाबले कम दिखाई देता है। हालांकि, चालान और निस्तारण की अवधि अलग हो सकती है, इसलिए इन आंकड़ों से सीधे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शेष चालान लंबित ही हैं।
तेज रफ्तार और नशे में ड्राइविंग भी चुनौती :
तेज गति से वाहन चलाने पर 6,094 चालान किए गए और 705 वाहन जब्त हुए। मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के 2,936 मामले सामने आए, जिनमें 381 वाहन जब्त किए गए। नशे में वाहन चलाने के 507 मामले दर्ज हुए और 257 वाहन जब्त किए गए। नो पार्किंग में 924 वाहन जब्त हुए, जबकि बिना हेलमेट के 295 वाहन जब्त किए गए। लालबत्ती उल्लंघन पर 8,959 चालान और 26 वाहन जब्त किए गए।
रॉन्ग साइड के 4,564 चालान :
बिना सीट बेल्ट के 3,545, तीन सवारी के 1,322, नो एंट्री के 1,290, स्टॉप साइन उल्लंघन के 1,222 और काली फिल्म के 904 चालान किए गए। रॉन्ग साइड वाहन चलाने पर 4,564 कार्रवाई हुईं। लापरवाही से वाहन चलाने के 330, प्रदूषण संबंधी उल्लंघन के 409 और पंजीकरण संबंधी उल्लंघन के 321 चालान किए गए। अन्य श्रेणियों में 5,001 कार्रवाई हुईं, जबकि रिफ्लेक्टर उल्लंघन में कोई कार्रवाई दर्ज नहीं हुई।आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट और पार्किंग नियमों का उल्लंघन सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। वहीं, चालानों के मुकाबले निस्तारण और राजस्व वसूली के आंकड़े भी सवाल खड़े करते हैं। सड़क सुरक्षा के लिहाज से नशे में ड्राइविंग, तेज रफ्तार और रॉन्ग साइड पर प्रभावी नियंत्रण अब भी अहम चुनौती है।
कोर्ट से ऑनलाइन जमा होती है राशि :
पहले चालान की जुर्माना राशि पुलिस को जमा कराई जाती थी जबकि अब यह राशि कोर्ट के माध्यम से और ऑनलाइन जमा होती है। अधिक से अधिक चालानों को निस्तारण करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सड़क दुघटनओं में कमी लाना पुलिस का उद्देश्य है।
-प्रवीण नायक
डीसीपी ट्रैफिक, जयपुर

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