बारिश में बदइंतजामियों का अभिनय : रवीन्द्र मंच पर ‘गुम’ हुई व्यवस्थाएं, जर्जर भवन ने कलाकारों-दर्शकों की बढ़ाई मुश्किलें
दीया कुमारी की विजिट के बाद भी नहीं बदले हालात
जयपुर। कभी एशिया के शीर्ष रंगमंचों में शुमार रहा रवीन्द्र मंच अपनी कला के लिए कम, बदहाली के लिए अधिक बोलता दिखाई दिया। नाटक ‘गुम’ का मंचन हुआ, लेकिन उससे पहले बारिश के पानी, अंधेरे और प्रशासनिक उपेक्षा में जैसे पूरा रवीन्द्र मंच ही गुम हो गया। मंच पर कलाकारों को अभिनय करना था, पर बाहर की अव्यवस्थाए ऐसा दृश्य रच रही थीं, जिसका फिलहाल कोई अंत दिखाई नहीं देता। बारिश के बाद पूरा परिसर तालाब में बदल गया। मुख्यद्वार से भीतर तक पानी भरा था और कलाकारों को मंच तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ी। दूसरा प्रवेशद्वार भी जलभराव की चपेट में था। नालियां जाम मिलीं और पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं। कई दर्शक निराश होकर नाटक देखे बिना ही लौट गए।
शाम ढलते ही परिसर अंधेरे में डूब गया। चोरी की पिछली घटनाओं के बावजूद पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। प्रेक्षागृह में चमगादड़ों और चूहों की मौजूदगी भी कलाकारों के लिए चिंता और असुविधा का कारण बनी हुई है। मुख्य पोर्च और छत से टपकता पानी भवन की जर्जरता की गवाही देता रहा।
बदहाली से रंग-संस्कृति भी खतरे में :
आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु झांकल ने कहा कि हालात अब केवल असुविधा का नहीं, सुरक्षा और रंग-संस्कृति के सम्मान का प्रश्न बन चुके हैं। प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। नाट्य निर्देशक नरेंद्र सिंह बब्बल ने भवन की मरम्मत, जल निकासी और कलाकारों के लिए आवश्यक सुविधाओं की मांग करते हुए स्थिति पर गहरी चिंता जताई। तमाशा कलाकार सचिन भट्ट ने इसे दयनीय बताते हुए तत्काल व्यापक मरम्मत की जरूरत बताई। नाट्य निर्देशक के.के. कोहली ने सरकार की उदासीनता को चिंताजनक बताया। उनके अनुसार मुख्य द्वार से ही पानी परिसर में भरने लगता है और कलाकारों का मंच तक पहुंचना संघर्ष बन जाता है। उनका कहना था कि भवन अब छोटे-मोटे सुधार नहीं, योजनाबद्ध कायाकल्प मांगता है।
दीया कुमारी की विजिट के बाद भी नहीं बदले हालात :
हाल ही में, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने रवीन्द्र मंच का दौरा किया था। इससे व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन बारिश के बाद जलभराव, टूटी दीवार, रोशनी और सीसीटीवी जैसी समस्याएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि विजिट के बाद जमीनी स्तर पर कितना बदलाव आया।

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