दिल्ली में कांग्रेस की महारैली : अपने खर्चे पर भीड़ लाने के स्पष्ट निर्देश, ठहराने की भी व्यवस्था करो
तैयारियों की योजना एआईसीसी को भेजने के निर्देश
जयपुर। मतदाता सूची की एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुडे मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की राष्ट्रीय महारैली को लेकर राजस्थान कांग्रेस में तैयारियों के साथ संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के 22 अक्टूबर के परिपत्र में प्रदेश से लेकर ब्लॉक स्तर तक अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने और 26 अक्टूबर तक तैयारियों की योजना एआईसीसी को भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं, रेल बस टिकट और दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था स्वयं करने की हिदायत ने संगठनात्मक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत होने वाली रैली में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों को आमंत्रित किया है।
समर्थकों का तर्क
बड़े आयोजन के लिए जरूरी है संगठनात्मक अनुशासन- निर्देशों के पक्ष में सामने रखे जा रहे तर्क के मुताबिक राष्ट्रीयय स्तर की रैली में प्रभावी भागीदारी के लिए जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर तक जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। त्यौहारों के दौरान रेल और बसों में भीड़ को देखते हुए अग्रिम टिकट बुकिंग तथा ठहरने की व्यवस्था पहले करने से अंतिम समय की अव्यवस्था से बचा जा सकता है। इस नजरिए से परिपत्र को तैयारियों की निगरानी और जवाबदेही तय करने की कवायद के रूप में देखा है।
आलोचकों का सवाल
लक्ष्य संगठन का, खर्च भी कार्यकर्ताओं का दूसरी ओर कुछ कांग्रेसियों ने निर्देशों की आलोचनात्मक व्याख्या में सवाल उठाया है कि जब जिला और ब्लॉक इकाइयों को अधिकतम लोगों को जुटाने का लक्ष्य दिया है तो यात्रा और आवास की व्यवस्था के लिए स्पष्ट संगठनात्मक सहयोग का उल्लेख क्यों नहीं है। आलोचकों के नजरिए से इससे स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक तथा प्रबंधकीय बोझ पड़ सकता है।
पारंपरिक व्यवस्था को आदेश में दोहराने की क्या जरूरत
आदेश में साफ लिखा है कि त्योहारों के मौसम में भीड़ देखते हुए रेल बस टिकटों और दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था स्वयं करें तथा अग्रिम बुकिंग सुनिश्चित करें। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जो व्यवस्था पारंपरिक रूप से हर प्रतिनिधिमंडल खुद ही करता आया है, उसे आधिकारिक आदेश में दोहराने की क्या जरूरत थी। आलोचकों का कहना है कि सवारी अपने माल का खुद ध्यान रखे वाली बात को कागजी रूप देने से ज्यादा कुछ नहीं निकला।

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