दो दिन में केवल 86 मिनट ही चली विधानसभा की कार्यवाही : ऐसा पहली बार हुआ, जब सदन सबसे कम समय चला

कार्यवाही तीन बार स्थगित की गई

दो दिन में केवल 86 मिनट ही चली विधानसभा की कार्यवाही : ऐसा पहली बार हुआ, जब सदन सबसे कम समय चला
राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही दो दिन में महज 86 मिनट चली, जो सदन के 48 साल के इतिहास में सबसे कम। हंगामे के कारण कार्यवाही तीन बार स्थगित। कांग्रेस विधायकों ने वैल में नारेबाजी कर वॉकआउट किया। हंगामे के बीच यूसीसी अधिनियम और राजस्थान विनियोग विधेयक 2026 पेश।

जयपुर। राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही दो दिन में केवल 86 मिनट चली। विधानसभा के 48 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब सदन की कार्यवाही सबसे कम अवधि की रही।

दूसरे दिन शुक्रवार को भी सदन की कार्यवाही हंगामें की भेंट चढ़ गई। सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित की गई। कांग्रेस के विधायकों ने वैल में आकर नारेबाजी की और राज्य सरकार की ओर से समान नागरिकता संहिता (यूसीसी) अधिनियम पेश करने के बाद सदन से वॉकआउट कर गए। इसके चलते सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। अब विधायी कार्यों को निपटाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न होने के बाद विधानसभा सत्र फिर बुलाया जाएगा। इसके लिए इस सत्र को राज्यपाल से सत्रावसान नहीं कराया जाएगा। विधानसभा के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने इस हंगामें और सदन की कार्यवाही नहीं चलने देने के लिए सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों को जिम्मेदार ठहराया है।

सदन की कार्य पहले दिन गुरुवार को केवल 22 मिनट चली और दूसरे दिन शुक्रवार को 64 मिनट चली। सदन की कार्यवाही शुक्रवार को सुबह 11 बजे शुरु हुई, तब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कांग्रेस विधायकों को विधानसभा के गेट पर रोके जाने का मुद्दा उठाया और इस पर चर्चा कराने की मांग की, जिसे आसन ने स्वीकार नहीं किया। जूली ने सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीठ को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान इस मसले पर बोलने की अनुमति नहीं दी। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा कर दिया। इस बीच कांग्रेस सदस्यों ने वैल में आकर नारेबाजी शुरु कर दी और सरकार भगौड़ी है के पोस्टर लहराए। भाजपा के विधायकों ने भी राहुल गांधी को भगौड़ा और चोर बताते हुए नारेबाजी शुरु कर दी। हंगामें के बीच अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने तीन सवालों पर नाम पुकारे, लेकिन प्रतिपक्ष की तरफ कोई नहीं बोला। करीब पांच मिनट बाद ही अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। दूसरी बार सदन की कार्यवाही शुरु हुई, तब भी कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा कर दिया। हंगामें के बीच निर्दलीय चन्द्रभान सिंह आक्या ने शून्यकाल में कुछ बोले, लेकिन हंगामें के कारण सुनाई नहीं दिया।  इस पर सभी 15 पर्चियों को पढ़ा हुआ मान लिया गया। इसके बाद अशोक कोठारी, गोविन्द प्रसाद और मनोज न्यांगली ने 295 में अपनी पर्चियां पढ़ी, लेकिन उनकी आवाज भी हंगामें के बीच सुनाई नहीं दी। हंगामा बढ़ते देख अध्यक्ष ने सवा बारह बजे दूसरी बार सदन की कार्यवाही एक बजे तक स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे फिर शुरु हुई, तो कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा कर दिया और नारेबाजी करते हुए वैल में आ गए। हंगामे के बीच संसदीय मंत्री जोगाराम पटेल ने समान नागरिकता संहिता अधिनियम और उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने राजस्थान विनियोग विधेयक 2026 का पुर:स्थापन किया। हंगामें के कारण 44 मिनट बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। 

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