कोटा में एनालॉग खाद्य सामग्री का काला कारोबार धड़ल्ले पर , पेट तक पहुंच रहा मिलावटी 'ज़हर'
खाद्य सुरक्षा विभाग उदासीन,कोटा में बेनामी सप्लायरों का बोलबाला
कोटा। शहर के बाजारों से लेकर चौपाटियों तक जड़े जमा चुका मिलावटी (एनालाग) खाद्य सामग्री का काला कारोबार त्योहारी सीजन करीब आते ही और अधिक शातिर तरीके से माल खपाने में जुट गया है। 'दैनिक नवज्योति' की विशेष ग्राउंड टीम ने जब शहर के प्रमुख बाजारों और सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल की, तो एक ऐसा नेटवर्क सामने आया जो बिना किसी रजिस्ट्रेशन, पते या ब्रांड के कोटावासियों की थाली में धीमा ज़हर परोस रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य एवं खाद्य नियंत्रण विभाग के बड़े-बड़े दावों के बावजूद यह अवैध नेटवर्क अधिकारियों की नाक के नीचे बेखौफ कैसे चल रहा है?
100 किलो पनीर का सौदा
रिपोर्टर द्वारा 100 किलो पनीर (किस्तों में) मांगने पर सप्लायर ने कहा अरे भैया, अभी डिपार्टमेंट की चेकिंग और सख्ती चल रही है, लेकिन कोटा में पनीर हो या सोहनपपड़ी, सब मिल जाएगा। भाव थोड़ा बढ़ा कर लगेगा, माल नयापुरा चौराहे पर पहुंचा दिया जाएगा।
5-5 लीटर के केन में 'बेनामी सॉस' स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़
मिठाइयों के अलावा शहर के प्रमुख चौपाटी सेंटरों, मोमोज और पेटीज के ठेलों पर पड़ताल करने पहुंची टीम को और भी खतरनाक तस्वीर देखने को मिली। ठेलों पर रखे 5-5 लीटर के प्लास्टिक केन पर न तो किसी कंपनी का नाम था, न ही सामग्री का ब्योरा। इन्हीं केन से निकला लाल सॉस और मेयोनेज धड़ल्ले से लोगों की प्लेटों में परोसा जा रहा था। जब ठेले चालकों से पूछा गया कि यह सॉस कहां बनता है, तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा हमें नहीं पता कहाँ बनता है, एक गाड़ी वाला आता है और केन दे जाता है। शहरवासी जिसे स्वाद समझकर खा रहे हैं, वह बिना किसी मानक के अवैध रूप से तैयार किया गया खतरनाक केमिकल्स और रंगों का घोल हो सकता है।
पारदर्शी थैली, बिना ब्रांड का डब्बा, कही तो खुद का ठप्पा
टीम गुमानपुरा और आसपास की बड़ी-बड़ी सजी-धजी मिठाईयों व पेठे वालों की दुकानों पर पहुंची। दिखने में बडी दुकानों के काउंटर पर रखी सोनपापड़ी और रसगुल्लों का सच कुछ और ही निकला। दरअसल पहले तो यह ग्राहक को क्वालिटी व स्वाद का कहकर रेट बताते उसके बाद खुद के कारखाने की बताकर शुद्घता का हवाला देते। जब उनसे कारखाने के बारे में पुछा तो बगले झांकने लगे। दुकानें तो चमचमा रही थीं, लेकिन सोनपापड़ी 100 से 135 रूपये प्रति किलो और रसगुल्ले 100 से140 रूपये प्रति किलो साधारण पारदर्शी थैलियों में बिना किसी एफएसएसएआई (ऋररअक) नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट या ब्रांड नाम के बिक रहे थे।
पूछताछ में खुली पोल
जब रिपोर्टर ने दुकानदार से सोनपापड़ी के कारखाने का पता पूछा, तो पहले उसने रोब झाड़ते हुए कहा यह माल हम खुद अपने कारखाने में तैयार करते हैं। लेकिन जब 40 किलो का थोक ऑर्डर मांगा गया और कारखाने में ले जाकर माल दिखाने को कहा गया, तो दुकानदार बगले झांकने लगा। परिचय देने पर उसने तुरंत सच कबूल करते हुए कहा कि हम तो माल मंगा कर देते है माल हमारा नहीं है, कोई बाहर से देकर जाता है।
दुकानदारों का गैर-जिम्मेदाराना जवाब
नाम न छापने की शर्त पर कुछ दुकानदारों ने बेफिक्री से कहा—हम तो बस फोन कर देते हैं और माल दुकान पर आ जाता है। सप्लायर आकर माल दे जाता है और पेमेंट ले जाता है। आज तक किसी ग्राहक ने शिकायत नहीं की, तो हमें भी कोई परेशानी नहीं आई। पड़ताल में सामने आया कि सप्लायर सुबह 9 बजे से पहले ही शहर के प्रमुुख चौराहों या जैसे चिन्हित इलाकों में पहुंचते हैं। कई दुकानदार तो इस बिना ब्रांड के माल पर अपनी ही दुकान का लेबल और मार्का चिपकाकर ग्राहकों को बेच रहे हैं।
आप को लेने आने की जरूरत नहीं, जगह बताओ कहां पहुंचाना है
सुत्रों से मिली कड़ियों को जोड़ते हुए नवज्योति टीम ने कोटा में सोनपापड़ी और पनीर की सप्लाई करने वाले मुख्य सप्लायर से संपर्क साधा। रिपोर्टर ने माल का रेट और कारखाने का पता पूछा, तो सप्लायर ने सीधे शब्दों में कहा—आप जगह बता दो कहां पहुंचाना है, या जब लेने आओ तभी फोन करना, जगह बता देंगे। माल कहां से आ रहा है, हम यह नहीं बता सकते। आप तो बस यह बताओ कि माल कब और कितना चाहिए? उसने रेट बताने से साफ मना करते हुए कहा कि जब माल पक्का चाहिए होगा, तभी रेट तय होंगे।
डेली मॉनिटरिंग शून्य
अगर अल सुबह गुमानपुरा सर्किल और नयापुरा जैसे इलाकों में नियमित सैंपलिंग और नाकेबंदी हो,तो यह पूरा गिरोह एक दिन में पकड़ा जा सकता है। बिना एफएसएसएआई रजिस्ट्रेशन के बिक रहा यह माल सीधे तौर पर शहरवासियों को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है।
-लोगों में दुकानदारों के प्रति एक विश्वास का रिश्ता ही उसे दुकान पर लेकर आता है। ऐसे में दुकान दारों की ही जिम्मेदारी है कि वह जो भी सामान बेच रहें है वह पूरी तरह से शुद्ध हो वही विभाग को भी हर दिन काम करना होगा तभी लोगों का शद्ध आहार मिल सकेगा।
- नितिन नान्ता
शहरवासियों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन दिलाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विभाग केवल दुकानों पर औपचारिक दौरों के बजाय इस अवैध सप्लाई चेन की जड़ मुख्य गोदामों और कारखानों व सप्लायरों पर कड़ा प्रहार करे।
- सीमा प्रजापति एडीसीए जिला अध्यक्ष
हमारी टीमें शहर में लगातार सेम्पलिंग करवाती रहती है। जहां भी सूचना मिलती है वहां सेम्पलिंग व जांच की कार्यवाहीयां लगातार अभियान के रूप में चलती है। नये स्टाफ के आने के बाद अभियान में और तेजी आएगी।
-डॉ. नरेन्द्र नागर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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