सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र : एक इलाके के दो रंग... वीआईपी बंगलों के बाहर चमक, आमजन की गलियां बेहाल
पार्किंग चिह्नित नहीं, मेट्रो पार्किंग निजी उपयोग के लिए
जयपुर। राजधानी के सबसे वीवीआईपी क्षेत्र को समेटे हुए सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में मौजूद नगर निगम के वार्डों की हालत कुछ ठीक नहीं है। सरकारें बदलती रहती हैं, जनप्रतिनिधि बदलते हैं, लेकिन नहीं बदलती तो इन वार्डो की किस्मत। क्षेत्र की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी और नगर निगम की सुस्ती के चलते स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है।
हूपर आता नहीं, खुले में कचरा डालने की मजबूरी :
क्षेत्र की कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां कचरा एकत्रित करने वाला हूपर नियमित नहीं आ रहा है। जिसके चलते स्थानीय निवासियों को मजबूरी में सड़क किनारे कचरा ड़ालना पड़ रहा है।
एक तरफ वीवीआईपी चकाचौंध, तो दूसरी तरफ अंधेरा :
सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के एक हिस्से में मुख्यमंत्री निवास और लोक भवन जैसा वीवीआईपी इलाका आता है, तो दूसरी ओर कई कच्ची बस्तियां भी इस क्षेत्र में शामिल हैं। वीवीआईपी इलाके में रहने वालों को इस शब्द के मुताबिक वीवीआईपी सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि दूसरी कई कॉलोनियों में कचरा उठाने वाला हूपर तक नियमित नहीं पहुंच रहा है।
उफनता सीवर, रोड पर अतिक्रमण :
क्षेत्र के कई मुख्य मार्गों अजमेर रोड और न्यू सांगानेर रोड पर आए दिन सीवरेज लाइन ब्लॉक होकर चैंबरों से गंदा पानी सड़क पर बहने लगता है। क्षेत्र की कई सड़कों पर अतिक्रमण और पार्किंग का भी अभाव है। न्यू सांगानेर रोड के अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट ने प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।
पार्किंग चिह्नित नहीं, मेट्रो पार्किंग निजी उपयोग के लिए :
न्यू सांगानेर रोड पर प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकृत पार्किंग नहीं है, जबकि यहां बड़ी संख्या में बैंक, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। मेट्रो यात्रियों के वाहनों के लिए बनाई गई पार्किंग को भी कैंटीन संचालन और एक कार कंपनी को अपने वाहन खड़े करने के लिए दिया गया है। मजबूरी में रोड पर वाहन खड़ा करने पर उसे ट्रैफिक पुलिस उठाकर ले जाती है।
कम प्रेशर की भी शिकायत :
विधानसभा क्षेत्र के लगभग सभी वार्डों में कम प्रेशर से पानी सप्लाई की समस्या भी है। कई इलाकों में तो पर्याप्त रूप से नियमित पेयजल सप्लाई भी नहीं हो रहा है। जिसके चलते आमजन को टेंकरों से पानी खरीदना पड़ता है।

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