सड़क हादसों में मौतों को रोकने की चुनौती, दुर्घटना होते ही पुख्ता इलाज की व्यवस्था

हादसों पर अंकुश लगेगी

सड़क हादसों में मौतों को रोकने की चुनौती, दुर्घटना होते ही पुख्ता इलाज की व्यवस्था
सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए राजस्थान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी। सड़क सुरक्षा कोष से चिकित्सा विभाग के 37.73 करोड़ रुपए के नए प्रस्ताव मंजूर। मुख्यमंत्री आयुष्मान सड़क सुरक्षा योजना में निजी अस्पतालों में निशुल्क उपचार के लिए 12.50 करोड़ स्वीकृत ।

जयपुर। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करना अभी बड़ी चुनौती बना हुआ है। सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ के प्रयासों के बावजूद हादसों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। ऐसे में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने अब दुर्घटनाओं के बाद घायलों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस किया है। सड़क सुरक्षा कोष से चिकित्सा विभाग से जुड़े 37.73 करोड़ रुपए के नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है। वहीं पहले से चल रहे 7.80 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को जारी रखने की अनुमति दी है।

निजी अस्पतालों में भी नि:शुल्क उपचार का दायरा बढ़ा : मुख्यमंत्री आयुष्मान सड़क सुरक्षा योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों के उपचार का दायरा बढ़ाया है। इसके लिए सड़क सुरक्षा कोष से 12.50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।

500 चिकित्सा कार्मिकों को मिलेगी इमरजेंसी ट्रेनिंग : आपातकालीन सेवाओं में तैनात प्रदेश के करीब 500 चिकित्सा कार्मिकों को एम्स नई दिल्ली के माध्यम से इमरजेंसी मैनेजमेंट ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। इसके लिए 4.81 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। इससे कार्मिक दुर्घटना के बाद गंभीर घायलों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकेंगे।

गोल्डन ऑवर में बीएलएस बनेगा जीवनरक्षक : विभाग का जोर दुर्घटना के तुरंत बाद मिलने वाली मदद को प्रभावी बनाने पर है। संभाग स्तर के मेडिकल कॉलेजों में बीएलएस ट्रेनिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा कोष के जरिए ट्रॉमा सुविधाओं, उपकरणों और प्रशिक्षित मानव संसाधन को मजबूत कर विभाग हादसों में होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में काम कर रहा है।

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यह होंगे कार्य :

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बीकानेर ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ ट्रेनिंग व एटीएलएस-बीएलएस स्किल लैब के लिए 3.85 करोड़।

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कार्डियक लाइफ सपोर्ट सर्टिफिकेशन कोर्स के लिए 1.63 करोड़।

अजमेर जेएलएन मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा सुविधा और माइक्रोस्कोप के लिए 5.50 करोड़।

54 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बीएलएस ट्रेनिंग सेंटर के लिए 48.22 लाख।

अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर में बीएलएस सेंटर के लिए 25-25 लाख।

सीकर मेडिकल कॉलेज में निर्माण व उपकरणों के लिए 4.66 करोड़, आरयूएचएस जयपुर में स्किल लैब व बीएलएस सेंटर के लिए 2.56 करोड़।

झालावाड़ को 25 लाख, जबकि डूंगरपुर के लिए 1.85 लाख, भीलवाड़ा के लिए 2.10 लाख, पाली के लिए 2.78 लाख और एसएमएस जयपुर ट्रॉमा सेंटर के लिए 13.98 लाख स्वीकृत।

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