मुक्त व्यापार समझौते की मार से एम एस एम ई को बचायें : आरतिया 

व्यापार घाटे और बढ़ते आयात पर जताई गहरी चिंता

मुक्त व्यापार समझौते की मार से एम एस एम ई को बचायें : आरतिया 
अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) ने केंद्र सरकार से मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के कारण बढ़ते आयात से एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को बचाने की अपील की है। आरतिया ने आयात आंकड़ों के प्रकाशन, तकनीकी सुधार कोष के गठन, 5 रुपये प्रति यूनिट बिजली और जीएसटी में राहत देने की मांग उठाई है।

जयपुर। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि मुक्त व्यापार समझौते के कारण जो आयात बढ़ रहा है, उसका बहुत बड़ा असर एम एस एम ई क्षेत्र पर आया है और बड़ी तादाद में एम एस एम ई इकाइयां बंद होने की कगार पर है। यह सिलसिला बढ़ गया तो देश‌ में अर्थव्यवस्था और रोजगार के आधार एम एस एम ई क्षेत्र बड़े पैमाने पर सिमट सकता है। वैश्विक व्यापार बढ़ाने के लिए भारत सरकार लगातार मुक्त व्यापार समझौते करती जा रही है, लेकिन उसके पहले घरेलू एम एस एम ई क्षेत्र को संरक्षित व सुरक्षित किया जाना महत्वपूर्ण ही नहीं अति आवश्यक है। 

आरतिया के विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, प्रेम बियाणी, कैलाश शर्मा, दिनेश गुप्ता, सज्जन सिंह, राजीव सिंहल, पंकज गोयल, दिनेश गोयल, हरि शर्मा, तरूण सारडा आदि ने कहा है कि अब तक 53 देशों से भारत सरकार ने मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इन समझौतों के बाद देश में न केवल आयात का प्रवाह बढ़ा है बल्कि भारत का विदेश‌ व्यापार घाटा भी नये रिकॉर्ड बना रहा है। उदाहरण के तौर पर गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का विदेश व्यापार घाटा 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक दर्ज किया गया जो कि कुल निर्यात की तुलना में 75 फीसदी से अधिक रहा। यह स्थिति समूचे आर्थिक परिदृश्य तथा उद्योग व्यापार जगत व रोजगार के लिहाज से चिंताजनक है।

टीम आरतिया ने सुझाया है कि सबसे पहले सरकार मुक्त व्यापार समझौते के तहत आयात होने वाली वस्तुओं के आयात के आंकड़े भी विदेश व्यापार आंकड़ों के साथ जारी करे, ताकि वस्तुस्थिति सतत सामने रहे। दूसरे जिन जिन वस्तुओं का आयात मुक्त व्यापार समझौते के तहत बढ़ रहा है और स्थानीय एम एस एम ई को प्रभावित कर रहा है, उन वस्तुओं के उत्पादक उद्यमियों से सीधे संवाद कर उनकी यथा स्थिति समझी जाये, ताकि सरकार की जानकारी में यह सच भी आ सके। प्रत्येक जिला उद्योग केन्द्र में एक विदेश व्यापार डेस्क बने जो आयात की मार से बचाने के लिए आवश्यक सुझाव सरकार को दे सके। इस डेस्क में संबंधित वस्तुओं के घरेलू उत्पादकों को भी शामिल किया जाये। इन सुझावों के आधार पर तत्काल तदनुसार राहत भी संबंधित एम एस एम ई सैक्टर को दी जाये।

टीम आरतिया ने यह भी कहा है कि जिन वस्तुओं के आयात का प्रवाह मुक्त व्यापार समझौते के कारण बढ़ रहा है, ऐसी वस्तुओं के उत्पादकों के लिए एक लाख करोड़ रुपए का एक तकनीकी सुधार कोष बनाया जाये, जिससे ऐसे उद्यमियों को बेहतर प्रतिस्पर्धा विकसित करने के लिए एक करोड़ रुपए तक की सहायता सुलभ कराई जाये। दूसरे ऐसी वस्तुओं की उत्पादक इकाइयों को बिजली मात्र पांच रुपए प्रति यूनिट की दर पर ( सभी शुल्क समेत ) सुलभ कराई जाये तथा तीसरे ऐसी वस्तुओं पर जीएसटी या तो समाप्त हो या फिर अधिकतम चार फीसदी सुनिश्चित किया जाए।

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