सीमा शुल्क प्रक्रियाएं सरल बनाने पर जोर, फोर्टी प्रतिनिधिमंडल ने रखे सुझाव, रिफंड सिस्टम

रत्न-आभूषणों के नियमों और डिजिटल सुविधाओं पर हुई चर्चा

सीमा शुल्क प्रक्रियाएं सरल बनाने पर जोर, फोर्टी प्रतिनिधिमंडल ने रखे सुझाव, रिफंड सिस्टम
व्यापारियों और उद्यमियों के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से जयपुर में सीमा शुल्क विभाग की ओर से आयोजित बैठक में फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।

जयपुर। व्यापारियों और उद्यमियों के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से जयपुर में सीमा शुल्क विभाग की ओर से आयोजित बैठक में फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। बैठक में व्यापार एवं उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए सुझाव रखे गए। बैठक में डीजीटीएस के प्रधान महानिदेशक डॉ. शैलेंद्र कुमार सिन्हा, जयपुर सीमा शुल्क आयुक्त आर.के. चंदन तथा अतिरिक्त आयुक्त नीरज दुबे और सुनीता वर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। फोर्टी की ओर से यूथ विंग अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, वुमन विंग अध्यक्ष नीलम मित्तल, सीए अक्षय जैन और विजय अग्रवाल ने सहभागिता की।

बैठक में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में संशोधन, स्वचालित रिफंड प्रणाली, रत्न एवं आभूषणों के लिए व्यक्तिगत रूप से साथ ले जाए जाने वाले सामान से संबंधित नियम-2016, अतिथि 2.0 ऐप और ईएमआई योजना सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें अंतर्देशीय कंटेनर डिपो के प्रतिनिधियों, कस्टम ब्रोकरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य संबंधित पक्षों ने भी अपने सुझाव साझा किए। फोर्टी यूथ विंग अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने व्यापारियों और निर्यातकों के लिए सीमा शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने, दस्तावेजी औपचारिकताओं को कम करने तथा डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं के सरलीकरण से कारोबारियों को सुविधा मिलेगी और व्यापार एवं निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। फोर्टी वुमन विंग अध्यक्ष नीलम मित्तल ने कहा कि बैठक का उद्देश्य व्यापार एवं उद्योग जगत की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाना और सरकार तथा कारोबारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इस तरह के संवाद से प्रक्रियाओं में सुधार और व्यापार-अनुकूल वातावरण विकसित करने में सहयोग मिल सकता है।

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