जर्जर स्कूल भवनों को गिराने की मंजूरी के बाद भी कार्रवाई नहीं, हादसों को न्यौता
1370 स्कूल अब भी बने हुए हैं खतरा
जयपुर। झालावाड़ स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों से मांगी रिपोर्ट में 3,455 स्कूलों को पूरी तरह जमींदोज किए जाने की सिफारिश थी, लेकिन एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी अभी तक 1370 स्कूल जमींदोज किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार के जमींदोज किए जाने की प्रशासनिक स्वीकृति देने के बावजूद 2085 स्कूलों को ही जमींदोज किया हैं। प्रदेश में सबसे बुरी स्थिति उदयपुर की हैं, जहां सबसे ज्यादा 240 प्राथमिक और 34 माध्यमिक शिक्षा के जर्जर भवन स्वीकृति के बावजूद अभी तक नहीं ढहाए गए।
किस स्तर के विद्यालयों को किया जाएगा जमींदोज
1370 विद्यालयों में से 1068 प्रारंभिक शिक्षा और 302 माध्यमिक शिक्षा के स्कूल शामिल हैं। प्रदेशभर में जिला कलेक्टर की गठित कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर जर्जर स्कूलों को जमींदोज किया जाना हैं।
इन स्कूलों में कुदाली तक नहीं चली
चित्तौड़गढ़ में 33, प्रतापगढ़ में 98 प्रारंभिक शिक्षा के भवन को पूरी तरह तोड़ना था, लेकिन अभी तक इन पर कुदाली नहीं चली हैं। झालावाड़ जिले में 327 विद्यालयों को जमींदोज किया था, अभी भी 32 स्कूलों को जमींदोज किया शेष हैं। जैसलमेर में 58 में से अभी तक तीन स्कूलों को ही ढहाया गया है। जयपुर संभाग के दौसा जिले में 92 प्रारंभिक शिक्षा के जर्जर भवन आज भी खड़े हैं। बीकानेर में प्रारंभिक शिक्षा के 38 और माध्यमिक शिक्षा के 37, श्रीगंगानगर में 44 प्रारंभिक शिक्षा के भवन अभी तक नहीं तोड़े गए हैं।
स्कूल खुलते ही गिर गई डूंगरपुर में भवन की छत
डूंगरपुर जिले के आसपुर ब्लॉक के गोठमहुड़ी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में स्कूल में पहली बारिश में छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि स्कूल के बच्चे उस दिन बाहर बैठे हुए थे, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
जर्जर स्कूल भवन गिरा रहे
जर्जर सभी स्कूलों को जमींदोज किया जा रहा है।
-राजेश यादव, अति.मुख्य सचिव शिक्षा विभाग, जयपुर
जर्जर स्कूलाें को जल्द ही गिरा देना चाहिए था, प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के बावजूद भी भवनों को नहीं गिराना चिंताजनक हैं। छोटे बच्चे उन भवनों में बैठते हैं,उनको नहीं गिराना हादसों को न्यौता हैं।
-विपिन प्रकाश शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

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