क्वांटम विज्ञान में बड़ी छलांग : बिट्स पिलानी की महिला वैज्ञानिक ने किया कमाल, सामान्य कंप्यूटर के दो घंटे का काम क्वांटम मशीन ने 20 सेकंड में किया

120 क्यूबिट पर किया सूक्ष्म कणों का अनुकरण

क्वांटम विज्ञान में बड़ी छलांग : बिट्स पिलानी की महिला वैज्ञानिक ने किया कमाल, सामान्य कंप्यूटर के दो घंटे का काम क्वांटम मशीन ने 20 सेकंड में किया
राजस्थान के बिट्स पिलानी की वैज्ञानिक डॉ. इंद्राक्षी रायचौधरी और उनकी टीम ने विश्व क्वांटम विज्ञान में भारत के लिए एक बड़ी छलांग। आईबीएम क्वांटम के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर टीम ने ऐसी जटिल भौतिक समस्या को क्वांटम कंप्यूटर पर हल किया है, जिसे सामान्य कंप्यूटरों के लिए अत्यंत कठिन। इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय क्वांटम एडवांटेज ट्रैकर ने प्रमाणित करते हुए अभी भी ह्यसक्रियह्ण उपलब्धि की श्रेणी में रखा।

जयपुर। राजस्थान के बिट्स पिलानी की वैज्ञानिक डॉ. इंद्राक्षी रायचौधरी और उनकी टीम ने विश्व क्वांटम विज्ञान में भारत के लिए एक बड़ी छलांग लगाई है। आईबीएम क्वांटम के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर टीम ने ऐसी जटिल भौतिक समस्या को क्वांटम कंप्यूटर पर हल किया है, जिसे सामान्य कंप्यूटरों के लिए अत्यंत कठिन माना जाता है। इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय क्वांटम एडवांटेज ट्रैकर ने प्रमाणित करते हुए अभी भी ह्यसक्रियह्ण उपलब्धि की श्रेणी में रखा है। बिट्स पिलानी के गोवा परिसर के भौतिकी विभाग में कार्यरत डॉ. रायचौधरी की टीम ने आईबीएम के क्वांटम प्रोसेसर के 120 क्यूबिट का उपयोग करते हुए प्रोटॉन के भीतर मौजूद क्वार्क और उन्हें बांधकर रखने वाले ग्लूऑन के बदलते व्यवहार का सफल अनुकरण किया है।

भारत के सामने अब अपनी क्वांटम मशीन की चुनौती
भारत ने वर्ष 2023 में लगभग 6,003 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मंजूरी दी थी। इसके अंतर्गत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, सेंसर और एल्गोरिदम पर शोध को प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन भारत के पास अभी अपनी अत्याधुनिक और उच्च क्षमता वाली क्वांटम मशीन नहीं है। भारतीय वैज्ञानिकों को प्रयोगों के लिए आईबीएम जैसी विदेशी संस्थाओं की मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

प्रोटॉन के भीतर चलती दुनिया को समझने की कोशिश
हर प्रोटॉन के भीतर क्वार्क नामक अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं। ग्लूऑन इन क्वार्कों को आपस में बांधकर रखते हैं। इनके बीच प्रबल नाभिकीय बल काम करता है। वैज्ञानिक सामान्य कंप्यूटरों की सहायता से प्रोटॉन का द्रव्यमान और उसके कुछ स्थिर गुणों की गणना तो कर सकते हैं, लेकिन उसके भीतर मौजूद क्वार्क और ग्लूऑन समय के साथ किस प्रकार चलते, बदलते और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, इसका वास्तविक समय में अनुकरण करना बेहद कठिन है। इसे सरल भाषा में इस तरह समझा जा सकता है कि सामान्य कंप्यूटर प्रोटॉन के भीतर की एक स्थिर तस्वीर बनाने में सक्षम है, जबकि डॉ. रायचौधरी की टीम ने क्वांटम कंप्यूटर की सहायता से उस तस्वीर को चलती हुई फिल्म में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।

वास्तविक भौतिक विज्ञान से जुड़ी समस्या को हल किया
क्वांटम मशीन ने यह गणना केवल 20 सेकंड में पूरी कर दी, जबकि एक सामान्य कंप्यूटर को उसी काम में लगभग दो घंटे लगे। वैज्ञानिकों के अनुसार उपलब्धि केवल गणना की गति तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक महत्ता यह है कि टीम ने किसी दिखावटी या विशेष रूप से तैयार की गई पहेली के बजाय वास्तविक भौतिक विज्ञान से जुड़ी उपयोगी समस्या को हल किया है।

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पहली भारतीय प्रयोगशाला जिसका दावा अब भी कायम
टीम की उपलब्धि की जांच क्वांटम एडवांटेज ट्रैकर ने की है। यह व्यवस्था क्वांटम कंप्यूटर की बढ़त के दावों को सामान्य और क्वांटम दोनों मशीनों पर परखती है। दुनिया भर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए लगभग 220 दावों में से केवल करीब एक दर्जन को स्वीकार किया गया है। इनमें भी गिने-चुने दावे ही अभी 'सक्रिय' हैं। बिट्स पिलानी की टीम का दावा उनमें शामिल है।

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27 क्यूबिट की सीमा को 120 तक पहुंचाया
इस क्षेत्र में दूसरे वैज्ञानिक अब तक समान प्रकार के प्रयोगों को अधिकतम लगभग 27 क्यूबिट तक ले जा पाए थे। भारतीय टीम ने विशेष कोडिंग पद्धति और गणना के दौरान पैदा होने वाली त्रुटियों को कम करने की तकनीक विकसित कर इसे 120 क्यूबिट तक पहुंचा दिया।

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सर्न के वैज्ञानिकों ने भी बुलाया
इस सफलता ने दुनिया की सबसे बड़ी कण-भौतिकी प्रयोगशाला सर्न का ध्यान भी आकर्षित किया है। सर्न के वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि बिट्स पिलानी की टीम की तकनीक उनके जटिल वैज्ञानिक अनुकरणों को आगे बढ़ाने में कितनी उपयोगी हो सकती है। इसी सिलसिले में डॉ. रायचौधरी को सर्न आमंत्रित किया गया है।

यह एल्गोरिदम और बड़े क्वांटम कंप्यूटरों पर भी काम कर सकता है। यदि उन्हें 1,000 क्यूबिट की मशीन उपलब्ध हो, तो एल्गोरिदम को उस स्तर तक बढ़ाया जा सकता है।
-डॉ.  इंद्राक्षी रायचौधरीु 

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