आस्था के साथ पारदर्शिता भी जरूरी : क्या बड़े मंदिरों को चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करना चाहिए?

राम मंदिर: श्रद्धा, समर्पण और जनविश्वास का प्रतीक

आस्था के साथ पारदर्शिता भी जरूरी : क्या बड़े मंदिरों को चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करना चाहिए?
बड़े मंदिरों में प्राप्त होने वाले दान, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का विधिवत दस्तावेजीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) होना चाहिए।

कोटा। अयोध्या का श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। इसके निर्माण के समय देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान दिया। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण की अभिव्यक्ति थी। राम मंदिर भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए मंदिरों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास का सम्मान आवश्यक है।

चढ़ावे का सार्वजनिक ब्योरा: बढ़ेगा भरोसा या बढ़ेंगी चुनौतियां?
देश के बड़े मंदिरों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सभी प्रमुख मंदिर ट्रस्टों को प्राप्त नकद दान, आभूषण और अन्य चढ़ावे का नियमित विवरण अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा दान को लेकर फैलने वाली अफवाहों और भ्रम पर रोक लगेगी। उनका कहना है कि केवल चढ़ावे की राशि ही नहीं, बल्कि उसके उपयोग का विवरण भी सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोग जान सकें कि उनके दान का उपयोग किन धार्मिक, सामाजिक और विकास कार्यों में किया जा रहा है।

दैनिक नहीं तो पखवाड़े या मासिक रिपोर्ट की मांग
हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि प्रतिदिन चढ़ावे का पूरा विवरण जारी करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि गणना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय लगता है। उनके अनुसार, पखवाड़े या मासिक आधार पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करना अधिक उपयुक्त रहेगा। राम मंदिर और बद्रीनाथ में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवादों के बाद यह चर्चा तेज हुई है कि क्या ऐसी घटनाएं श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित करती हैं और क्या पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े मंदिरों को चढ़ावे तथा उसके उपयोग का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए? इसी मुद्दे पर दैनिक नवज्योति ने शहर के मंदिरों से जुड़े महंतों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और आम लोगों से बातचीत कर उनकी राय जानी।

हाल की घटनाओं से श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। यह प्रबंधन की कमी का परिणाम है। बड़े मंदिरों में प्राप्त दान और उसके उपयोग का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, हालांकि प्रतिदिन ऐसा करना व्यावहारिक नहीं है। बेहतर होगा कि 15 दिन या महीने में एक बार रिपोर्ट जारी की जाए। मंदिर प्रबंधन में ईमानदार लोगों की नियुक्ति हो, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
-पं. शैलेन्द्र भार्गव, महंत, गोदावरी धाम, कोटा

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ऐसी घटनाएं श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित करती हैं। प्रतिदिन चढ़ावे का विवरण वेबसाइट पर देना संभव नहीं है, क्योंकि रोज दानपात्र खोलना व्यावहारिक नहीं होगा। मंदिर ट्रस्ट को या सरकार को हर महीने आय और चढ़ावे का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भ्रम की स्थिति न बने।
- अनुपम जैन, प्रकाश ट्रेडर्स

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श्रद्धा पर ऐसे मामलों का असर पड़ता है, इसलिए मंदिरों की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। दान की गिनती सीसीटीवी और सार्वजनिक निगरानी में हो , जहां दान की रसीद काटी जा रही है वहां भी सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए।दान ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर के बैंक खाते में लिया जाए। समय-समय पर चढ़ावे का विवरण सार्वजनिक किया जाए और प्रबंधन में जुड़े लोगों का नियमित रोटेशन एवं निगरानी भी सुनिश्चित हो।
- डॉ. सुधीर उपाध्याय, अध्यक्ष, श्रीराम मंदिर स्टेशन

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इस तरह की घटनाओं से लोगों की आस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, जहां श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान किया है। ऐसे मामलों से लोगों में निराशा पैदा होती है और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है।जैसे सांवरियाजी मंदिर में दानपात्र खोलने की पूरी प्रक्रिया वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है और यह बताया जाता है कि कितना नकद, चांदी या अन्य चढ़ावा प्राप्त हुआ, उसी तरह अन्य बड़े मंदिरों में भी आय-व्यय का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। इसकी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हो और सरकार की निगरानी भी सुनिश्चित हो।
- क्रांति जैन, अध्यक्ष, कोटा व्यापार महासंघ

श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। बड़े मंदिरों में प्राप्त होने वाले दान, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का विधिवत दस्तावेजीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) होना चाहिए।इनका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए और समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाए। राम मंदिर देश की सबसे बड़ी आस्था का केंद्र है, इसलिए वहां की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
- डॉ. सुषमा आहुजा, इतिहासकार, कोटा

ऐसी खबरों से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं, लेकिन पहले सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि गड़बड़ी हुई है तो कार्रवाई हो। किसी भी धार्मिक संस्था में पारदर्शिता और ईमानदार प्रबंधन बनाए रखना श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा के लिए आवश्यक है।
- डॉ. मनोज राठौर, नेचुरोपैथ, फिजियोथेरेपिस्ट एवं आहार-पोषण विशेषज्ञ

ऐसी घटनाओं से लोगों की आस्था प्रभावित होती है। कई बड़े मंदिरों में बहुत अधिक चढ़ावा आता है। चढ़ावे के लिए बैंकिंग या कोई पंजीकृत व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि प्रतिदिन का हिसाब सुरक्षित रहे। सांवरिया सेठ मंदिर इसका अच्छा उदाहरण है, जहां हर चीज का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है और इस तरह की शिकायतें सुनने में नहीं आतीं बैंकिंग और डिजिटल माध्यम से दान को बढ़ावा दिया जाए तथा हर महीने चढ़ावे, आभूषण और ऑनलाइन लेन-देन का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करके सार्वजनिक किया जाए। साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री को भी अपडेट करें।राज्य सरकार और मुख्यमंत्री स्तर पर भी इसकी निगरानी होनी चाहिए।मंदिर में लोग श्रद्धा और विश्वास से दान करते हैं, इसलिए उस धन का सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन होना अपेक्षित है।
- प्रियंका गुप्ता, अध्यक्ष, जेसीआई कोटा शक्ति एवं अभिलाषा क्लब

ऐसी घटनाओं का लोगों की आस्था पर असर पड़ता है। चढ़ावे की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, लेकिन इसकी सत्यता सुनिश्चित करने के लिए केवल ट्रस्ट पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। सरकार को किसी विभाग के अधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए, जो नियमित निगरानी करे।यदि प्रतिदिन का रिकॉर्ड रखा जाए तो कैश बुक से उसका मिलान भी हो सकेगा और सरकार को भी जानकारी रहेगी कि रोज कितना चढ़ावा और नकद दान प्राप्त हुआ। ज्वेलरी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का भी पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए। निजी मंदिर ट्रस्ट अपनी व्यवस्था चलाएं, लेकिन प्रतिदिन के चढ़ावे का सत्यापन सरकारी अधिकारी की निगरानी में होना चाहिए।
- लोकेश शर्मा, डायरेक्टर, आद्या सेवार्थ फाउंडेशन

राम मंदिर मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। किसी घटना से भगवान के प्रति श्रद्धा कम नहीं होती। श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका स्थायी असर नहीं पड़ता। लेकिन बड़े चढ़ावे वाले मंदिरों में पारदर्शिता जरूरी है। रसीद के माध्यम से मिलने वाले दान का विवरण नियमित रूप से वेबसाइट पर डाला जाना चाहिए और दानपात्र (गुल्लक) की गिनती जिस दिन हो उसी दिन उसका विवरण सार्वजनिक कर दिया जाना चाहिए।
- गोविंद नारायण अग्रवाल, अध्यक्ष, राधा कृष्ण मंदिर, तलवंडी

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