हादसों के बाद भी नहीं सुधरे हालात

दो साल में आधा दर्जन हादसों में 10 से अधिक की हो चुकी मौत

हादसों के बाद भी नहीं सुधरे हालात
शहर में मकानों के ऊपर व पास से निकल रही हैं हाइटेंशन लाइनें।

कोटा ।  केस एक: अनंतपुरा थाना क्षेत्र स्थित बरड़ा बस्ती में एक दिन पहले हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूटने से फेले करेंट से एक महिला की मौत हो गई और करीब 10 लोग बुरी तरह से झुलस गए। वहीं हादसे में दो गायों की भी मौत हो गई।

केस दो: कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित काली बस्ती में मार्च 2024 में धार्मिक यात्रा के दौरान झंडा हाईटेंशन लाइन से छू जाने के कारण लगे करेंट से करीब एक दर्जन लोग झुलस गए थे। हादसे में तीन लोगों की मौत भी हो गई थी।

केस तीन: कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के सकतपुरा काली बस्ती में ही जुलाई 2025 में छत पर कपड़े सुखाते समय करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं महिला को बचाने के प्रयास में उनके पति भी करंट लगने से झुुलस गए थे।

ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। उन घटनाओं व हादसों को बताने के लिए जो हाइटेंशन लाइनों के कारण हुए हैं। शहर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं। पिछले करीब दो साल में ही आधा दर्जन से अधिक मामले हाइटेंशन लाइनों से करंट लगने के हो चुके हैं। जिनमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग झुलस चुके हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक भी हालात नहीं सुधरे हैं। अभी भी शहर के इलाके हो या आस-पास के ग्रामीण इलाके। वहां मकानों के ऊपर व पास से 33 केबी व 11 केबी की हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। जिनसे रोजाना हजारों लोगों की जान खतरे में है। उसके बाद भी न तो ये लाइनें शिफ्ट हो रही हैं और न ही लोग वहां से हट रहे हैं। नतीजा हजारों लोगों के सिर पर रोजाना जान का खतरा मंडरा रहा है।

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हर जगह है हाइटेंशन लाइनें
शहर के इलाके हो या ग्रामीण क्षेत्र के हाइटेंशन लाइनें हर जगह पर है। फिर चाहे वह अनंतपुरा स्थित बरड़ा बस्ती हो या शिवपुरा क्षेत्र। दादाबाड़ी का वक्फ नगर हो या कुन्हाड़ी का नांता क्षेत्र। इतना ही नहीं डीसीएम क्षेत्र के प्रेम नगर व गोविंद नगर या काली बस्ती। रेलवे कॉलोनी, भीमगंजमंडी, नयापुरा, पाटनपोल समेत शहर के सभी क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। इनमें से अधिकतर जगह पर ये लाइनें मकानों के ऊपर से व मकानों के नजदीक से गुजर रही हैं।

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बरसात में अधिक खतरा
हाइटेंशन लाइन से हर समय खतरा है। इन लाइटों में इतना अधिक करंट होता है कि वह करीब 3 से साढ़े तीन फीट से कम की दूरी पर लोगों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में जिन घरों के ऊपर व पास से ये लाइनें गुजर रही हैं उनके लिए बरसात में खतरा अधिक है। बरसात के समय ऐसी जगह पर करंट फेलने व करंट लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना बनी हुई है।

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ऊर्जा मंत्री ने दिए थे लाइन शिफ्ट करने के निर्देश
करीब दो साल पहले सकतपुरा की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइन से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत व एक दर्जन लोगों के झुलसने की घटना के बाद मौके पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर ने यहां से हाइटेंशन लाइनें शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। लोगों का कहना है कि अभी तक भी वहां से लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। ऐसा एक ही जगह पर नहीं कई जगह पर है लेकिन लाइनें वहीं के वहीं है।

खतरनाक लाइनें हों शिफ्ट
लोगों का कहना है कि हाइटेंशन लाइनों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ऐसे में इन खतरनाक लाइनों को शिफ्ट किया जाना चाहिए। कुन्हाड़ी निवासी मोहन सिंह सोलंकी का कहना है कि नदी पार क्षेत्र की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइनों से कई बार हादसे हो चुके हैं उसके बाद भी लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। जबकि चाहे मकान बाद में बने हों लेकिन हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट करना बिजली विभाग का काम है। शिवपुरा निवासी महेश कुमार नागर का कहना है कि हाइटेंशन लाइनें शहर से दूर व आबादी क्षेत्र से नहीं गुजरनी चाहिए। हालांकि कई लोगों ने मकान बाद में बनाए जिससे लाइनें उनके मकान के पास से निकल रही है। लेकिन मकान बनने के बाद जब लोग वहां रहने लगे हैं तो उन लाइनों को शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएं। जिससे लोगों की जान को खतरा नहीं हो।

इनका कहना है 
लोगों को लाइट की सुविधा चाहिए तो इसके लिए जीएसएस से ट्रांसफार्मर तक लाइट हाइटेंशन के माध्यम से ही आती है। बिना हाइटेंशन के लाइट की सुविधा निर्बाध रूप से मिलना मुश्किल है। लेकिन हाइटेंशन लाइनें पहले डली हुई है। लोगों ने मकान बाद में बनाए हैं। जिससे वे लाइनों के नजदीक पहुंचे है। अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती में अवैध खनन के कारण इंसुलेटर टूटने से हादसा हुआ है। हाइटेंशन लाइनों से एक निर्धारित मानक दूरी बनाए रखना आवश्यक है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को नोटिस व चेतावनी दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी जहां अधिक लोगों के जानमाल को नुकसान का खतरा रहता है। वहां से अन्य स्थानों पर हाइटेंशन लाइन शिफ्ट की जा सकती है। लेकिन उसका आधा खर्चा लोगों को वहन करना होता है। साथ ही लाइन के साथ ही खम्बे शिफ्ट करने की जगह भी होनी चाहिए। पूर्व में कई जगह पर ऐसा किया भी गया है।
- शिवचरण जांगिड़, अधीक्षण अभियंता जेवीवीएनएल

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