ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी
गहरे पानी और काई जमी फिसलन भरी चट्टानों से सुरक्षित दूरी बनाए
कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।
सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी
वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।
पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल
भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।
गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।
नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।
इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक
1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)
कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।
सुविधाएं व सावधानी
यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।
जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।
2. चट्टानेश्वर महादेव
कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।
सुविधाएं व सावधानी
एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।
3. आलनिया डैम
कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।
4. बरधा बांध
कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।
सुविधाएं व सावधानियां
यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।
5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)
शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।
सुविधाएं व सावधानी
धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।
आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल
मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।
-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा
आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद
सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।
- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम
इनका कहना है
हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।
-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व
पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।
- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी

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