जंतर-मंतर स्मारक : 9 साल में अपनी ओर खींचे 95.72 लाख पर्यटकों के कदम, 78.24 करोड़ रुपए की आय
देश-विदेश के सैलानियों के लिए बना वैज्ञानिक विरासत का सबसे बड़ा आकर्षण
जयपुर। विश्व धरोहर के रूप में अपनी पहचान बना चुका जयपुर का जंतर-मंतर स्मारक 31 जुलाई को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल होने के 16 वर्ष पूरे कर लेगा। 31 जुलाई 2010 में विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद यह स्मारक न केवल देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बना, खगोल विज्ञान, ज्योतिष और प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान को समझने का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन गया।
95 लाख 72 हजार से अधिक आए पर्यटक
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक जंतर-मंतर स्मारक में 95 लाख 72 हजार 130 पर्यटक पहुंचे। इनमें भारतीय पर्यटकों और विद्यार्थियों की संख्या 78 लाख 12 हजार 58 तथा विदेशी पर्यटकों और विद्यार्थियों की संख्या 16 लाख 83 हजार 642 रही। इसके अलावा 76 हजार 430 पर्यटकों ने ऑनलाइन टिकट लिया। इन सालों में विभाग को 78 करोड़ 24 लाख 29 हजार 446 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। स्मारक के संरक्षण और रखरखाव पर प्रतिवर्ष लगभग 15 से 20 लाख रुपए खर्च होते हैं।
पर्यटकों के लिए बना इंटरप्रिटेशन सेंटर
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद स्मारक परिसर में आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया गया। यहां महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के जीवन, जंतर-मंतर के निर्माण, विभिन्न खगोलीय यंत्रों की कार्यप्रणाली और उनके वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी जाती है। केंद्र में यंत्रों के मॉडल, प्राचीन ज्योतिषीय पांडुलिपियां, दुर्लभ दूरबीन तथा अन्य पुरावशेष भी प्रदर्शित किए गए हैं। सवाई जयसिंह द्वितीय की प्रतिमा भी यहां है।
विद्यार्थियों के लिए नियमित गतिविधियां
जंतर-मंतर स्मारक की अधीक्षक प्रतिभा यादव के अनुसार स्मारक में समय-समय पर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं।
देश की सबसे सक्रिय वेधशाला
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने वर्ष 1724 से 1734 के बीच जयपुर जंतर-मंतर (वेधशाला) का निर्माण कराया था। यहां स्थापित विशाल खगोलीय यंत्र आज भी समय, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और अन्य खगोलीय गणनाओं में सटीक जानकारी देने की क्षमता रखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली, मथुरा और वाराणसी के जंतर-मंतर (वेधशाला) में यंत्र अब सक्रिय नहीं हैं, जबकि उज्जैन वेधशाला में सीमित संख्या में यंत्र हैं।
युवाओं और शोधार्थियों की बढ़ रही दिलचस्पी
टूरिस्ट गाइड महेश शर्मा बताते हैं कि भारतीय युवा और विद्यार्थी यहां के वैज्ञानिक यंत्रों की कार्यप्रणाली को समझने में विशेष रुचि दिखाते हैं। वहीं विदेशी पर्यटकों में विशेषकर 35 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग और खगोल विज्ञान की सटीकता देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
जंतर-मंतर (2017-18 से 2025-26)
पर्यटक संख्या एवं राजस्व
श्रेणी संख्या
भारतीय पर्यटक 65,87,140
भारतीय विद्यार्थी 12,24,918
कुल भारतीय पर्यटक संख्या 78,12,058
विदेशी पर्यटक 16,01,955
विदेशी विद्यार्थी 81,687
कुल विदेशी पर्यटक संख्या 16,83,642
ऑनलाइन टिकट लेकर आए पर्यटक 76,430
कुल पर्यटक (9 वर्ष में) 95,72,130
कुल राजस्व 78,24,29,446

Comment List