पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, बोले- दम घुटकर मरने से बेहतर स्वाभिमान की मौत
चापलूसी की परंपरा के साथ अब कदमताल नहीं कर सकते
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता विश्वेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भावुकता भरे बयान में कहा कि पार्टी की गलत रीति-नीति और चापलूसी की परंपरा के साथ अब कदमताल नहीं कर सकते। दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है।
उन्होंने लिखा कि यह कदम निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का नतीजा है। विश्वेन्द्र सिंह ने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर भरतपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा, डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा हमला बोला था। उनका आरोप था कि दोनों जिलाध्यक्षों ने चहेतों को टिकट बांटे और असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया, जिससे पार्टी को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने डोटासरा को मूक-बधिर बताया था और कहा था कि जनता अब इन नेताओं को कब्र में दफनाने को तैयार है। डीग के पांच वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के शर्मनाक नतीजों का भी उन्होंने जिक्र किया था।
विश्वेन्द्र सिंह ने यह लिखा :
इस्तीफे के संदेश में विश्वेन्द्र सिंह ने लिखा कि आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जीवन में हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही फैसला लिया है। आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं, उससे मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है, मेरा भी अंतर मन दुखी और व्यथित है। जिस पार्टी के लिए मैंने मेरा जीवन न्यौछावर कर दिया, आज उसी पार्टी ने यदि मेरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता का यह सिला दिया तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने हमेशा मान-सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है, सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। यदि सच को सच कहना, गलत और झूठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा। मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं। मेरा सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है, मैं इनके लिए ही जीता हूं और इनके लिए ही मरूंगा। मेरे खून का हर कतरा मेरे कार्यकर्ताओं, मेरे मतदाताओं, मेरे क्षेत्रवासियों, प्रदेशवासियों के लिए बहा है और बहेगा। मेरा सार्वजनिक जीवन खुली किताब है, बेदाग है। मैंने मेरे दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और ना ही लगने दूंगा।
उन्होंने पुरखों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी ऐसी चीजों से समझौता नहीं किया। उन्हीं का अनुसरण करते हुए वे अलविदा कह रहे हैं क्योंकि गलत रीति-नीति के साथ अब कदमताल नहीं कर पाएंगे। इससे पहले विश्वेन्द्र सिंह ने डोटासरा पर शिक्षा मंत्री रहते रीट परीक्षा में कथित धांधली और परिवार के सदस्यों को आरएएस इंटरव्यू में समान अंक दिलाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे तथा उनके इस्तीफे की मांग की थी। पार्टी स्तर पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा रही थी, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया।

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