कमर दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी : डॉ. डीपी शर्मा
बदलती जीवनशैली से युवाओं में भी बढ़ी समस्या
जयपुर। आधुनिक जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर दर्द अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है। अब 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। एसडीएमएच के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि कमर के निचले हिस्से में हड्डियों, मांसपेशियों, लिगामेंट्स और नसों में किसी तरह की समस्या दर्द का कारण बन सकती है। गलत पोश्चर में लंबे समय तक बैठना, अचानक झुकना, भारी वजन उठाना, नियमित व्यायाम नहीं करना और मांसपेशियों में खिंचाव कमर दर्द के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा स्लिप डिस्क, बढ़ती उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में होने वाले बदलाव, नस दबने से होने वाला साइटिका, मोटापा त्और विटामिन-डी एवं कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है।
ये है बचाव :
डॉ. शर्मा ने बताया कि बचाव के लिए काम करते समय सही एर्गोनॉमिक्स अपनाना जरूरी है। रीढ़ को सहारा देने वाली कुर्सी का इस्तेमाल करें और हर 45 मिनट में उठकर 2-3 मिनट टहलें। नियमित हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है। संतुलित आहार, दूध व डेयरी उत्पाद, हरी सब्जियां और पर्याप्त धूप भी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यदि दर्द 2-3 सप्ताह से अधिक बना रहे, आराम के बावजूद ठीक न हो या पैरों तक दर्द जाए, साथ में सुन्नपन, कमजोरी या झनझनाहट हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में न्यूरोसर्जन या विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।

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