निर्दलीयों को भा रहे अलमारी, सेब, गुब्बारा  जैसे चिह्न : अलमारी से खुलेंगे चुनावी राज, बांसुरी बजाएगी किस्मत

यह चिह्न आसानी से पहचाने जा सकते हैं

निर्दलीयों को भा रहे अलमारी, सेब, गुब्बारा  जैसे चिह्न : अलमारी से खुलेंगे चुनावी राज, बांसुरी बजाएगी किस्मत
नगरीय निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच चुनाव चिह्नों को लेकर दिलचस्प मुकाबला। अलमारी, सेब, बांसुरी, सिलाई मशीन और गुब्बारा सबसे पसंदीदा प्रतीकों में। जूते-चप्पल जैसे पारंपरिक चिह्नों की मांग कम। प्रत्याशी ऐसे प्रतीक चाहते हैं, जिन्हें मतदाता आसानी से पहचान सकें।

जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव में नामांकन का शोर थमने के बाद अब चुनावी मैदान में एक और दिलचस्प मुकाबला शुरू हो गया है। यह मुकाबला प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि चुनाव चिह्नों की पसंद को लेकर है। निर्दलीय प्रत्याशियों में इस बार अलमारी, सेब, बांसुरी, सिलाई मशीन, गुब्बारा, चारपाई, टेलीविजन, रोड रोलर और बोतल जैसे चिह्न खास पसंद रहे। वहीं, जूते चप्पल जैसे पारंपरिक चुनाव चिह्नों को प्रत्याशियों ने अपेक्षाकृत तवज्जों नहीं दी।

निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए चुनाव चिह्न ही उनकी पहचान और प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम होता है। पार्टी प्रत्याशियों को जहां पहले से तय दलगत चिह्न मिल जाता है, वहीं निर्दलीयों को आयोग की ओर से उपलब्ध मुक्त प्रतीकों में से विकल्प चुनना होता है। एक ही चुनाव चिह्न के लिए एक से अधिक प्रत्याशियों की दावेदारी होने पर नियमानुसार उसका आवंटन लॉटरी से किया जाता है। इस बार उपलब्ध प्रतीकों में अलमारी और सेब प्रत्याशियों को खास पसंद आ रहे हैं। प्रत्याशियों का मानना है कि यह चिह्न आसानी से पहचाने जा सकते हैं और मतदाताओं को मतदान के समय याद रखने में भी आसानी होगी। इसी तरह बांसुरी, सिलाई मशीन और गुब्बारा भी प्रचार की दृष्टि से आकर्षक माने जा रहे हैं। बोतल जैसे प्रतीक को लेकर भी प्रत्याशियों में दिलचस्पी दिखाई दे रही है।

जूते-चप्पल क्यों हुए पीछे :

चुनाव चिह्नों की सूची में जूता और चप्पल जैसे प्रतीक मौजूद होने के बावजूद इनकी मांग इस बार उतनी जोरदार नजर नहीं आ रही। प्रत्याशी अब ऐसा प्रतीक चाहते हैं, जिसे पोस्टर, पर्चे, सोशल मीडिया और घर-घर संपर्क के दौरान आसानी से प्रचारित किया जा सके। खासकर शहरी चुनाव में प्रतीक की दृश्य पहचान को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव चिह्नों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने सबसे अधिक अलमारी को पंसद किया है। उसके बाद सेब, बासुंरी व गुब्बारे को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही भुट्टे और हसिया, गैस सिलेंडर, केतली, हरि मिर्च, चक्की, बाल्टी, फूलगोभी, कोट, बक्सा, प्रेस, हेलिकॉप्टर, गिजली का खंबा, कैंची भी प्रत्याशियों की कम पसंद रहे।

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प्रतीक बनेगा प्रत्याशी की ब्रांडिंग :

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निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए चुनाव चिह्न  महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि चुनावी ब्रांडिंग का हिस्सा है। प्रत्याशी ऐसा निशान चाहते हैं जिसे मतदाता एक नजर में पहचान ले और मतदान के दिन ईवीएम पर उसे ढूंढने में परेशानी न हो। प्रत्याशियों की गुरुवार को नाम वापसी के बाद शुक्रवार को चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाएगा। अब निगाहें चुनाव चिह्न आवंटन पर टिकी हैं। इसके बाद जयपुर की चुनावी गलियों में कहीं अलमारी खोलने की अपील होगी तो कहीं बांसुरी बजाने और गुब्बारे का संदेश सुनाई देगा।

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