अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : जयपुर टाइगर फेस्टिवल के संवाद में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को दिए संरक्षण के संदेश, 18-21 दिसंबर को होगा 8वां संस्करण
पर्यटन के साथ वन्यजीवों के सम्मान की जरूरत पर भी जोर
जयपुर। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में बुधवार को आयोजित बाघ संरक्षण-संवाद में विशेषज्ञों ने बाघ को शक्ति, संयम और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक बताया। संगीतकार एवं वन्यजीव संरक्षक अभिषेक रे ने कहा कि बाघ जितना शक्तिशाली है, उतना ही संयमित भी है और प्रकृति से केवल अपनी आवश्यकता भर ही लेता है। उन्होंने कहा कि उनके संगीत की प्रेरणा भी जंगलों से मिलती है। पूर्व फील्ड डायरेक्टर सुनयन शर्मा ने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण के लिए जंगल और जंगलों के संरक्षण के लिए बाघ आवश्यक हैं।
उन्होंने पर्यटन के साथ वन्यजीवों के सम्मान की जरूरत पर भी जोर दिया। डॉ. राजेश कुमार व्यास ने बाघ को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और धैर्य का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में जयपुर टाइगर फेस्टिवल के 8वें संस्करण (18 से 21 दिसंबर) के पोस्टर का विमोचन किया गया तथा विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से बाघ संरक्षण से जुड़े सवाल भी पूछे।

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