गर्मी में मनरेगा कार्यों की बढ़ी मांग : भुगतान अटकने से प्रभावित हो रही गति, कृषि कार्य ठप पड़ने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक मनरेगा पर निर्भर

भुगतान में देरी से काम प्रभावित

गर्मी में मनरेगा कार्यों की बढ़ी मांग : भुगतान अटकने से प्रभावित हो रही गति, कृषि कार्य ठप पड़ने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक मनरेगा पर निर्भर

भीषण गर्मी के बीच मनरेगा कार्य की मांग तेज हो गई है। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर सहित मरुस्थलीय जिलों में जल संरक्षण कार्य बढ़े हैं। दक्षिणी राजस्थान में वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण, जबकि पूर्वी जिलों में सड़क व नाली निर्माण की मांग बढ़ी। भुगतान देरी से काम प्रभावित, फिर भी 10 लाख से अधिक श्रमिक सक्रिय हैं।

जयपुर। राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में काम की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की है।  ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य ठप पड़ने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक मनरेगा पर निर्भर हो रहे हैं। राज्य के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, जालौर, पाली और उदयपुर जिलों में काम की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है। मरुस्थलीय इलाकों में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों जैसे तालाब खुदाई, नाड़ी निर्माण, चेकडैम और मेडबंदी की मांग अधिक है। दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों में वृक्षारोपण, चारागाह विकास और मिट्टी संरक्षण कार्यों में श्रमिकों की भागीदारी बढ़ी है। पूर्वी जिलों जैसे भरतपुर, धौलपुर और करौली में सड़क मरम्मत, नाली निर्माण और जल निकासी कार्यों की मांग बढ़ी है।

भुगतान में देरी से काम प्रभावित

काम की बढ़ती मांग के बावजूद योजना की गति भुगतान में देरी के कारण प्रभावित हो रही है। केन्द्र और राज्य सरकार से मिलने वाली मजदूरी और सामग्री मद की राशि समय पर नहीं पहुंचने से कई पंचायतों में कार्य धीमे पड़ गए हैं। श्रमिकों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों ने कहा है कि राज्य ने केन्द्र से लंबित राशि जारी करने का आग्रह किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर फंडिंग हो तो मनरेगा गर्मी के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकती है।

पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में मनरेगा श्रमिकों को मिला सहारा

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पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और अलवर जिलों में अनुमानित रूप से 4.5 से 5 लाख श्रमिकों ने अतिरिक्त काम की मांग दर्ज की है। दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों में करीब 5 से 6 लाख श्रमिकों की मांग बढ़ी है।

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