अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : राजस्थान के संग्रहालयों में इतिहास की धड़कनें, हर साल लाखों की संख्या में आते हैं देशी और विदेशी पर्यटक 

पहले पायदान पर अल्बर्ट हॉल, इसके बाद चित्तौड़गढ़, भरतपुर, अजमेर संग्रहालय का नम्बर

अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : राजस्थान के संग्रहालयों में इतिहास की धड़कनें, हर साल लाखों की संख्या में आते हैं देशी और विदेशी पर्यटक 

राजस्थान के 22 संग्रहालयों में संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटकों को आकर्षित कर रही। वर्ष 2025-26 में 17.92 लाख देशी-विदेशी पर्यटक संग्रहालय पहुंचे, पिछले साल से 86 हजार अधिक। जयपुर का अल्बर्ट हॉल सबसे लोकप्रिय।

जयपुर। राजस्थान के संग्रहालयों में राजपूत शौर्य, लोक संस्कृति, हथियार, पांडुलिपियां, चित्रकला, मूर्तिकला, वस्त्र, आभूषण और पुरातात्विक धरोहरों का अनमोल संग्रह संग्रहित है। जयपुर का अल्बर्ट हॉल संग्रहालय प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध संग्रहालय है, जो इजिप्ट की ममी, प्राचीन सिक्के, हथियारों और दुर्लभ कलाकृतियों के लिए जाना जाता है। कहा जाए तो प्रदेश में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन करीब 22 संग्रहालय हैं। इन संग्रहालयों में तकरीबन दो लाख से अधिक पुरा वस्तुएं संग्रहित हैं। इनमें से करीब 25 से 30 हजार पुरा वस्तुएं पर्यटकों के अवलोकनार्थ संग्रहालयों में प्रदर्शित हैं। जबकि बाकि वस्तुएं संग्रहालय के स्टोर में सुरक्षित हैं।

साल 2025-26 में 17,92,129 पर्यटकों ने निहारी दुर्लभ वस्तुएं :

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन करीब 22 संग्रहालयों में साल 2025-26 में 17,92,129 देशी और विदेशी पर्यटकों ने विभिन्न पुरावस्तुओं को देखा। सबसे अधिक पर्यटक जयपुर के अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में 10,57,551 आए। वहीं राजकीय संग्रहालय चित्तौड़गढ़ में 3,87,847, भरतपुर में 1,15,839, अजमेर में 76,774,  मण्डोर में 72,672 सहित अलवर, कोटा, झालावाड़, पाली, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, सीकर, बूंदी, बारां सहित अन्य संग्रहालय में 17,92,129 पर्यटक आए।

2024-25 की अपेक्षा 2025-26 में बढ़ी संख्या: पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के संरक्षित 22 संग्रहालयों में  एक अप्रेल, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक 17,05,215 पर्यटक आए। 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 17,92,129 हो गई। इस साल 86,914 पर्यटक अधिक आए।

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पुरानी वस्तुएं दर्शनीय ही नहीं ज्ञान वर्धक भी :

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प्रदेश के संग्रहालयों में प्रदर्शित पुरानी वस्तुएं केवल देखने के लिए नहीं अपितु ज्ञानवर्धन भी हैं। इनसे पर्यटकों को सालों पुरानी संस्कृति, खानपान सहित अन्य चीजों की जानकारी मिलती है। विभाग के 22 संग्रहालयों में दो लाख से अधिक पुरा वस्तुएं संग्रहित हैं। इनमें से करीब 30 हजार पुरा वस्तुएं पर्यटकों के अवलोकनार्थ प्रदर्शित हैं।

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-डॉ. पंकज धरेन्द्र

निदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग।  

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