International Nurses Day : अस्पतालों में मरीजों का बढ़ता भार, नर्सेज की भारी कमी नतीजा: मरीजों को नहीं मिल पा रही क्वालिटी नर्सिंग केयर

अस्पतालों में इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नॉर्म्स भी नहीं हो पा रहे पूरे

International Nurses Day : अस्पतालों में मरीजों का बढ़ता भार, नर्सेज की भारी कमी नतीजा: मरीजों को नहीं मिल पा रही क्वालिटी नर्सिंग केयर

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाईमानसिंह सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में नर्सेज जरूरत के अनुपात में काफी कम है। 

जयपुर। प्रदेश में चिकित्सा के क्षेत्र में अब काफी विस्तार हो चुका है। जयपुर तो मेडिकल हब बन चुका है। वहीं प्रदेश के लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं लेकिन बावजूद इसके अस्पतालों में आज भी मैन पावर की बहुत कमी है। इनमें सबसे ज्यादा जरूरत अगर किसी संवर्ग की है तो वो है नर्सिंग संवर्ग। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाईमानसिंह सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में नर्सेज जरूरत के अनुपात में काफी कम है। 
ऐसे में ऑपरेशन या इलाज के बाद जो नर्सिंग केयर मरीजों को मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा रही है। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में करीब 70 हजार नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंगकर्मी हैं। जबकि करीब 18 हजार संविदा नर्सेज अस्पतालों में काम कर रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा नर्सिंगकर्मियों की इन अस्पतालों में अब भी जरूरत है। वहीं नर्सिंग स्टाफ के अवकाश लेने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियमों के अनुसार 30 प्रतिशत लीव रिजर्व नर्सेज स्टाफ भी होना चाहिए। ऐसे में वर्तमान संख्या के साथ ही करीब 40 हजार नर्सेज की प्रदेश में और जरूरत है। 

पूरा वार्ड एक या दो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे
इंडियन मेडिकल काउंसिल के नॉर्म्स के अनुसार अस्पतालों में मरीजों के अनुपात में नर्सेज की भारी कमी है। प्रदेश के सबसे बड़े सवाईमानसिंह अस्पताल सहित अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एक वार्ड में 50-50 मरीज सिर्फ एक या दो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे हैं। डॉक्टर और मरीज के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी नर्सिंग स्टाफ  है। इसके बावजूद सरकार अस्पतालों में इनकी कमी को नजरअंदाज किया जा रहा है।  

क्या कहते हैं आईएनसी के नियम
इंडियन नर्सिंग काउंसिल के तय मापदंडों के अनुसार आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों पर एक नर्स का होना जरूरी है। अगर मरीज ज्यादा गंभीर है तो एक बैड पर एक नर्स होना चाहिए। जनरल वार्ड में छह मरीजों पर एक नर्स होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में वर्तमान स्थिति में ये मापदंड सिर्फ  कागजों में ही हैं।

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