राजस्थान संस्कृत अकादमी की अनूठी पहल, NEP-2020 के तहत पहली बार इंटर्नशिप कार्यक्रम आयोजित
भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत और संस्कृति का लिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
जयपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में राजस्थान संस्कृत अकादमी ने नवाचार करते हुए पहली बार विद्यार्थियों के लिए एक माह का इंटर्नशिप कार्यक्रम आयोजित किया। राजस्थान संस्कृत अकादमी एवं राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में गायन, कथक, वायलिन, सितार और तबला सहित विभिन्न विधाओं के करीब 46 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन समारोह गुरुवार को अकादमी सभागार में हुआ।
इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य, खगोल विज्ञान, ज्योतिष, वास्तु, वेदों में संगीत, पांडुलिपियों और हस्तरेखा विज्ञान से संबंधित जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को ज्योतिषीय गणना एवं खगोल विज्ञान की व्यावहारिक जानकारी देने के लिए जयपुर के जंतर-मंतर का भ्रमण भी करवाया गया। अकादमी के इतिहास में यह NEP-2020 के अनुरूप पहला ऐसा प्रयास है।
अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव देना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से जोड़ना है। अकादमी की मुहिम 'एक कदम भारतीय संस्कृति की ओर' के माध्यम से युवा पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक चेतना की समृद्ध परंपरा का आधार है।
राजस्थान संगीत संस्थान के प्राचार्य प्रो. मुरारी लाल दायमा ने कहा कि कला, संस्कृति और शिक्षा का यह समन्वय विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने में सहायक होगा। इंटर्नशिप समन्वयक प्रो. डॉ. सुनीता श्रीमाली ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के अनुभवों का शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
समापन समारोह में विद्यार्थियों ने स्वयं मंच संचालन किया। इस दौरान शिव तांडव नृत्य, गणेश स्तोत्र, राम स्तोत्र, कथक नृत्य तथा सितार और वायलिन पर संस्कृत स्तोत्रों की संगीतमय प्रस्तुतियां दी गईं। विद्यार्थियों ने इंटर्नशिप के दौरान अर्जित अनुभव भी साझा किए।

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