राजस्थान आवासन मंड़ल कार्रवाई के नोटिस से मची दहशत : बेदखली के डर से सैकड़ों परिवार चिंतित, क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री को लिखा भावुक पत्र

वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई लगी हुई

राजस्थान आवासन मंड़ल कार्रवाई के नोटिस से मची दहशत : बेदखली के डर से सैकड़ों परिवार चिंतित, क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री को लिखा भावुक पत्र

शहर के बाहरी क्षेत्र की 87 कॉलोनियों में 30-40 वर्षों से रह रहे परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा। राजस्थान हाउसिंग बोर्ड द्वारा 26 मार्च को कार्रवाई का नोटिस जारी होने से लोगों में दहशत। क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वैध दस्तावेज वाले मकानों के नियमितीकरण और अन्य परिवारों के पुनर्वास की मांग की।

जयपुर। राजस्थान आवासन मंडल की अवाप्तशुदा जमीनों पर वर्षों से रह रहे दर्जनों परिवारों के सामने अब बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को एक भावुक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में उन्होंने कहा है कि “जीते जी अपने घर नहीं उजड़ने देंगे”, क्योंकि इन मकानों में उनके परिवारों की वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई लगी हुई है।

नियमन हेतु संघर्ष समिति अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाडा एवं महासचिव परशुराम चौधरी ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि इलाके में करीब 87 कालोनियों में पिछले 30-40 वर्षों से रह रहे हैं। यहां अधिकांश लोग मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हाल ही में राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की ओर से 26 मार्च को कार्रवाई का नोटिस जारी किया गया है, जिससे सभी परिवारों में दहशत का माहौल है। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के पास पहले से जारी एनओसी और अन्य दस्तावेज भी हैं, फिर भी अचानक बेदखली की कार्रवाई से लोगों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यहां रहने वाले लोगों ने वर्षों की मेहनत से छोटे-छोटे मकान बनाए हैं और अब उन्हें तोड़े जाने की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और गरीब परिवारों को राहत प्रदान करे। उन्होंने आग्रह किया कि जिन परिवारों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें नियमित किया जाए और जिनके पास नहीं हैं, उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो सैकड़ों लोगों के सिर से छत छिन जाएगी। फिलहाल, सभी की निगाहें सरकार के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

 

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