जोधपुर प्रसूताओं की बीमारी प्रकरण : मंत्री ने प्रारम्भिक जांच में लापरवाही नहीं मानी, एक महिला जोधपुर एम्स रैफर
सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश
जयपुर। जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में प्रसूताओं के तबीयत बिगड़ने के मामले में चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि छह प्रसूताओं की हालत स्थिर और सामान्य है। वहीं एक प्रसूता के हाई डायबिटीज और बीपी के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए जोधपुर एम्स में शिफ्ट किया है। एक अन्य प्रसूता पीलिया ग्रसित है। उसका एक्सपर्ट डॉक्टर्स की निगरानी में इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि 8 प्रसूताएं विभिन्न जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों के साथ पावटा राजकीय जिला अस्पताल में पहुंची थी। इस प्रकरण को बीकानेर और कोटा के मामलों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सरकारी अस्पतालों पर आमजन का विश्वास है। राजकीय अस्पतालों में प्रसव की सफलता दर 99.99 प्रतिशत है। पावटा मामले की गहन चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया मामला लापरवाही का नहीं है, लेकिन फिर भी किसी भी प्रकार की लापरवाही मिली तो संबंधित जिम्मेदार कार्मिकों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण मरीज दूसरे अस्पतालों से राजकीय चिकित्सालयों में पहुंचता है तब गंभीर स्थिति पैदा होती है, लेकिन हमारे राजकीय चिकित्सक अधिकांश मामलों में मरीजों को बेहतर उपचार देते हैं। किसी भी सरकारी अस्पताल में कोई घटना होने पर सरकार गंभीरता से लेती है। निष्पक्षता से गहन जांच पड़ताल कराती है। कोटा प्रसूताओं के प्रकरण में यूटीबी पर लगे चिकित्सक को हटाया गया। दो चिकित्सकों एवं 2 नर्सिंग अधिकारियों को निलम्बित किया और अस्पताल अधीक्षकों को नोटिस दिया गया। फार्मा कंपनी के ड्रग्स के कंटेंट मानक अनुरूप नहीं होने पर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। लाइसेंस निरस्त किया गया। अस्पतालों को एसओपी की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश पूर्व में ही दिए गए हैं।

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