झीलों की नगरी उदयपुर को राहत, देवास पेयजल योजना को मिली नई रफ्तार
वन स्वीकृति से खुला विकास का रास्ता
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के लिए बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी देवास तृतीय एवं देवास चतुर्थ पेयजल परियोजना को वन स्वीकृति मिलने के साथ ही शहर की जल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम आगे बढ़ गया है। वर्षों से प्रतीक्षित इस मंजूरी ने परियोजना के निर्माण कार्यों को नई गति प्रदान कर दी है। जल संसाधन विभाग ने इसे उदयपुर के भविष्य और जल प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उदयपुर की बढ़ती आबादी, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और भविष्य की जल आवश्यकताओं को देखते हुए इस परियोजना को शहर की लाइफलाइन माना जा रहा है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से 25 अप्रैल 2023 को 1690.55 करोड़ रुपए की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। परियोजना के अंतर्गत गोगुंदा क्षेत्र में देवास-तृतीय और देवास-चतुर्थ बांधों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही लंबी सुरंगों के माध्यम से जल का संचयन कर उसे उदयपुर की झीलों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना न केवल शहर की पेयजल आवश्यकता को पूरा करेगी, बल्कि झीलों के जलस्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे आने वाले वर्षों में जल संकट की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों में प्रगति
परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 2349 प्रभावित किसानों में से 812 किसानों को 20.73 करोड़ रुपए से अधिक की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन के लिए भूमि आरक्षित की गई है तथा आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं निरंतर जारी हैं। विभाग का दावा है कि किसानों और प्रभावित परिवारों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
वन स्वीकृति से निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार
देवास परियोजना के अंतर्गत बांध और सुरंग निर्माण के लिए ठेके पहले ही जारी किए जा चुके हैं और विभिन्न स्थलों पर निर्माण गतिविधियां प्रारंभ हो चुकी हैं। हालांकि वन क्षेत्र से जुड़ी स्वीकृतियों के अभाव में कुछ कार्यों की गति प्रभावित हो रही थी। अब वन स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्यों को और अधिक रफ्तार मिलेगी तथा परियोजना को निर्धारित समयावधि में पूरा करने की दिशा में प्रगति होगी। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि मंजूरी मिलने से तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी तेजी आएगी।

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