खाकी का गजब खेल : वाह री पुलिस! जो पैदा ही नहीं हुए थे, उनको ही बना दिया गवाह
अब कोर्ट ने मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
जयपुर। जो पैदा ही नहीं हुए थे, उनको चश्मदीद गवाह बनाने का रोचक किन्तु गंभीर मामला सामने आया है। मामले का खुलासा होने के बाद अब कोर्ट ने 14 अगस्त को पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट भी उस समय अचंभित रह गई, जब उसे पता चला कि रिकॉर्ड में कांट-छांट कर और फर्जी तरीके से जमीन हड़पने के इस मामले में पुलिस ने भी गजब खेल किया है। मामला बस्सी थाना इलाके के चावंडिया गांव का है। इस कथित फर्जीवाडे का मामला अदालत के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने दर्ज तो कर लिया था, किन्तु पुलिस ने मामले में फर्जीवाड़े और षड्यंत्र का खुलासा करने के बजाय केस डायरी में ऐसे लोगों को भी चश्मदीद गवाह बना डाला, जो कथित घटनाक्रम के वक्त तक पैदा ही नहीं हुए। कुछ गवाह दो से चौदह साल के बच्चे बना लिए गए। इस मामले में बस्सी पुलिस अभियुक्तों को बचाने के लिए दो बार एफआर की सिफारिश कर चुकी है, लेकिन दोनों बार अलग-अलग स्तर पर मुंह की खानी पड़ी।
यह है प्रकरण :
बस्सी थाने में 16 जून, 2025 को एफआईआर 359/2025 दर्ज हुई थी। पीड़ित हनुमान सहाय ने आरोप लगाया था कि चांवड़िया गांव की उसकी पुश्तैनी जमीन को भू-माफियाओं ने सरकारी तंत्र से मिलकर अपने नाम करा लिया। हनुमान सहाय को अपने साथ हुए धोखे की, भनक तब मिली जब कुछ लोग उनकी जमीन बाजार में बेचने निकले। पीड़ित ने तहसील कार्यालय जाकर राजस्व रिकार्ड खंगाला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जालसाजों ने सरकारी कारिंदों से मिलकर मूल जमाबंदी में पीड़ित परिवार का नाम काटकर बाकायदा ओवरराइटिंग करते हुए फर्जी तरीके से जमीन अपने नाम करा ली। इस पर हनुमान सहाय ने पांच व्यक्तियों सतीश, गिरिराज, रामस्वरूप, सुरेश तथा रामकिशोर के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच कर एफआर लगा कर उसे कोर्ट में पेश कर दिया, लेकिन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-12 बस्सी महानगर कोर्ट कविता शर्मा ने उसे स्वीकार नहीं किया और 29 अप्रैल को निर्देश दिए कि इस प्रकरण की नए सिरे से जांच करे और 14 अगस्त को तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करे।
पैदा नहीं होने वालों की गवाही :
पीड़ित हनुमान सहाय ने जब कोर्ट को जानकारी दी, कि वे महादेव के वंशज हैं। अभियुक्तों ने महादेव का फर्जी वारिस बनने की साजिश रची। 1977 में महादेव के निधन पर सतीश पुत्र सत्यनारायण का पगड़ी दस्तूर होने की कहानी रची। पुलिस ने झूठी कहानी को सच साबित करने के लिए आठ व्यक्तियों को प्रत्यक्षदर्शी मानते हुए गवाह बनाया है। पगड़ी दस्तूर के घटनाक्रम के इन गवाहों में से दो गवाह सतीश और वीरेन्द्र कुमार तो 1977 में पैदा ही नहीं हुए थे। सतीश का जन्म दो साल बाद और वीरेन्द्र का चार साल बाद हुआ। अन्य गवाहों में से राजेश कुमार की आयु सिर्फ 2 साल तथा अशोक कुमार की आयु 9 साल और गौरीशंकर की उम्र 14 वर्ष थी। सबूत के तौर पर पीड़ित हनुमान सहाय ने कोर्ट में चुनाव विभाग की मतदाता सूची का रिकार्ड पेश किया है।

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