मशीनें हुईं बेकार, ओवरलोड वाहन अब भी बेलगाम
179 पोर्टेबल वेइंग मशीनों का इस्तेमाल नहीं
जयपुर। ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान परिवहन विभाग ने 179 पोर्टेबल वेइंग मशीनें खरीदने में 21.26 करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लेकिन इनका फील्ड में प्रभावी उपयोग नहीं हो सका। मशीनों को विभाग के ई-चालान और वाहन-4.0 सॉफ्टवेयर से इंटीग्रेट करने की योजना भी पूरी नहीं हुई। अब कैग के ऑडिट परीक्षण में पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार हाईवे पर वजन करने वाले स्थायी कांटों की दूरी अधिक होने के कारण हर ओवरलोड वाहन को वहां ले जाना मुश्किल होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए उड़नदस्तों को पोर्टेबल वेइंग मशीनें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था, ताकि सड़क पर ही वाहनों का वजन कर मौके पर चालान किया जा सके।
27 करोड़ मंजूर, 21.26 करोड़ का भुगतान : वित्त विभाग ने मई, 2021 में 179 पोर्टेबल वेइंग मशीनों के लिए 27 करोड़ रुपए मंजूर किए। अगस्त, 2021 में निविदाएं आमंत्रित की गई और दिसंबर, 2021 में एक फर्म को 26.72 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर दिया गया। कंपनी को मशीनों की आपूर्ति के साथ पीओएस मशीन से इंटीग्रेशन, तीन वर्ष की वारंटी, मेंटेनेंस और तकनीकी सहायता देनी थी। विभाग ने मार्च, 2022 में कंपनी को 21.26 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। दिसंबर, 2022 में परिवहन आयुक्त की कमेटी ने समीक्षा की तो मशीनों में कई कमियां सामने आई। इनका ना तो पीओएस मशीनों से इंटीग्रेशन हुआ और न ही वाहन-4.0 से जोड़ा जा सका।
उड़नदस्तों की शिकायतें भी नहीं सुलझीं : दिसंबर, 2022 में परियोजना प्रबंधन इकाई की बैठक में कंपनी प्रतिनिधि ने मशीनों में हार्डवेयर डिवाइस लगाने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद इंटीग्रेशन नहीं हो सका। मई से दिसंबर, 2023 के बीच उड़नदस्तों ने कई तकनीकी समस्याएं बताई, जिनका प्रभावी समाधान नहीं हुआ।
3.01 करोड़ का जुर्माना भी अटका :
वर्ष 2023-24 में नौ आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों के ऑडिट में पाया गया कि 15 मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं हुआ। ई-चालान बनाने में भी मशीनें उपयोगी साबित नहीं हुई। जून, 2023 से जनवरी, 2024 के बीच कंपनी पर 3.01 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया, लेकिन विभाग इसकी वसूली भी नहीं कर सका। विभाग ने कंपनी की बैंक गारंटी जब्त करने की कार्रवाई कर इतिश्री कर ली है।
सेल्फ फाइनेंसिंग का दावा भी फेल :
विभाग ने मशीनों की खरीद को सेल्फ फाइनेंसिंग मॉडल पर आधारित बताया था। अनुमान था कि ओवरलोड वाहनों से वसूले जाने वाले जुर्माने से एक साल में लागत निकल जाएगी और 43 करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। हकीकत में मशीनों का इस्तेमाल ही नहीं हो सका और विभाग कंपनी से 3.01 करोड़ रुपए का पेनल्टी भी वसूल नहीं पाया। कैग ने आंतरिक परीक्षण में 21.26 करोड़ रुपए के खर्च को निरर्थक बताया गया है।

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