दूध की डेयरी से गांव की बदलेगी तस्वीर, खेती से लेकर लोन देने और बीमा तक का बनेंगी केन्द्र
संशोधन के लिए नई आदर्श उपविधियों में बड़ा बदलाव
जयपुर। गांवों में अब दुग्ध डेयरी समिति के जरिए दूध उत्पादक पशुपालन, चारा, प्रजनन, पशु चिकित्सा, बीमा, ऋण, कृषि इनपुट, बागबानी, मधुमक्खी पालन, मुर्गीपालन, डिजिटल सेवा और अन्य गतिविधियों से अधिक कमा सकेंगे। उपभोक्ता स्टोर, किराना स्टोर, गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप जैसी गतिविधियां भी लाइसेंस और संबंधित कानूनों के अधीन की जा सकेंगी। सहकारिता विभाग ने बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी सोसाइटी (एम-वीडीसीएस) के लिए नई आदर्श उपविधियां जारी की हैं।
राज्य में कितने दूध उत्पादक ?
जयपुर डेयरी अकेले जयपुर और दौसा जिलों में 2.2 लाख से अधिक सदस्यों और 2,800 से अधिक सक्रिय दुग्ध समितियों के नेटवर्क के माध्यम से काम कर रही है।
दूध का भुगतान सीधे खाते में :
नई व्यवस्था का आम किसान पर सबसे प्रत्यक्ष असर डिजिटल भुगतान का होगा। समिति के सदस्यों को दूध का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जाएगा और दूध प्राप्त होने के 10 दिन के भीतर राशि सीधे बैंक खाते में डालने का प्रावधान है।
राजस्थान में मौजूदा तस्वीर :
राजस्थान के सहकारी क्षेत्र में 2025-26 के दिसंबर तक औसत दुग्ध संकलन करीब 30.29 लाख लीटर प्रतिदिन रहा, जबकि स्थापित प्रसंस्करण क्षमता 51.40 लाख लीटर प्रतिदिन थी। यानी राज्य की डेयरी क्षमता और वास्तविक दुग्ध संकलन के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।
अब सदस्य बनना आसान नहीं :
नई उपविधियों में सक्रिय दुग्ध उत्पादक सदस्य के लिए कम से कम 180 दिन दूध की आपूर्ति और साल में 300 लीटर दूध देने की शर्त है। यह बड़ी चुनौती है। फ्लश और लीन सीजन में दूध आपूर्ति का अनुपात भी 3:1 रखा गया है। नई समिति के मामले में यह न्यूनतम दुग्ध आपूर्ति संबंधी शर्त पंजीकरण के दो साल बाद लागू होगी। एक परिवार से केवल एक व्यक्ति सदस्य बन सकेगा।
राजस्थान में रोजाना करीब 1000 लाख लीटर दूध उत्पादन :
जयपुर। राजस्थान देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्ष 2024-25 में देश के कुल दूध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 14.82 प्रतिशत रही। राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) के अनुसार, प्रदेश में रोजाना करीब 1000 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। हालांकि, इसका पूरा दूध सहकारी डेयरी व्यवस्था तक नहीं पहुंचता। दिसंबर 2025 तक सहकारी डेयरियां प्रतिदिन करीब 30.29 लाख लीटर दूध खरीद रही थीं। दिसंबर 2024 तक प्रदेश में सहकारी डेयरी व्यवस्था से 9.25 लाख दुग्ध उत्पादक जुड़े हुए थे। यह संख्या केवल सहकारी समितियों से जुड़े उत्पादकों की है, प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों की कुल संख्या नहीं।

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