माइनिंग ट्रांसपोर्टेशन हाईटेक : 2.25 लाख ट्रकों की ज्यादा निशानदेही, चोरी हो रही कमाई खजाने में आई
कांटों में लाइव ऑटोमाइजेशन
जयपुर। राजस्थान में माइनिंग ट्रांसपोर्टेशन हाईटेक होने से प्रदेश में चोरी हो रही खनन रॉयल्टी अब सरकारी खजाने में जमा हो रही है। साथ ही वैध खनन के ई-रवन्ना के बिना चोरी छिपे ट्रांसपोर्ट से अवैध परिवहन के धंधे पर भी अंकुश लगा है। माइनिंग साइट्स से खनन माल को लेकर जाने वाले ट्रकों से लेकर ई-रवन्ना कटने और माल के गंतव्य तक पहुंचने तक को अब खान विभाग ऑनलाइन देख रहा है। इस इंटीग्रेटेड सिस्टम के डेवलप होने से प्रदेश में बीते सवा पांच माह में सरकार को खनन रॉयल्टी से 621 करोड़ की ज्यादा कमाई हुई है। ऐसे में आगामी एक साल में सरकार को खनन ट्रांसपोर्ट से करीब 1500 करोड़ की कमाई ज्यादा होने की उम्मीद है जो सरकारी खजाने में आएगी।
2212 कांटों में लाइव ऑटोमाइजेशन, 67903 ट्रकों पर वीटीएस लगे
प्रदेश में खनन माल को तोलने के लिए 2592 तुलाई कांटे हैं। इनका लाइव ऑटोमाइजेशन कर दिया गया है। वहीं खनन ट्रांसपोर्ट में चल रहे 6703 ट्रको को रजिस्टर्ड कर उन पर आरएफर्आडी -वीटीएस यानी व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम लगा दिया गया है।
- ट्रक के माल भरते ही उसके परिवहन रूट की ट्रेकिंग शुरू हो जाती है। वहीं तुलाई कांटे पर माल तुलते ही
- उसका सीधा रिकॉर्ड डिजिटल साफ्टवेयर पर खान विभाग के पास पहुंच जाता है। ई-रवन्ना कटते ही
- पोर्टल पर अपडेट होता है। ऐसे में परिवहन में लगे किसी भी ट्रक से
- अवैध परिवहन यानी बिना ई-रवन्ना रॉयल्टी पर्ची कटे बगैर ट्रांसपोर्ट नामुमकिन हो गया है।
आरएफआईडी तकनीक
ट्रक पर लगा आरएफआईडी यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टैग को कांटे पर रीडर पहचानता है। ट्रांसपोर्ट परमिट की डिजिटल प्रणाली से तुरंत मिल जाता है।
जीपीएस आधारित वीटीएस
ट्रकों की लोकेशन और उनके निर्धारित मार्ग की निगरानी होती है। मार्ग बदलने या संदिग्ध परिवहन की पहचान आसान हो जाती है।
सेंसर, कैमरे और ऑटोमैटिक बैरियर
कैमरों से वाहन की तस्वीर खींच जाती है। सेंसर वाहन की पहचान कर लेता है। बैरियर और ट्रेफिक लाइट वाहन के प्रवेश व निकास को कंट्रोल कर सकती है।
सरकार की कमाई कैसे बढ़ी
प्रदेश में ऑनलाइन ट्रेकिंग नहीं होने से पहले अप्रैल से सितम्बर के पहले सप्ताह तक बीते साल 43 लाख 55 हजार 487 ट्रको की ई-रवन्ना काटकर रॉयल्टी वसूली गई थी। जबकि इस बार इंटीग्रेटेड सिस्टम बनने पर इस समयावधि में 45 लाख 81 हजार ट्रको के ई रवन्ना से रॉयल्टी आई। 2.25 लाख ट्रको से ज्यादा रॉयल्टी ली गई। कमाई जो 1844.9 करोड़ रुपए थी, वह इस समयावधि में 2465.9 करोड़ हो गई। 621 करोड़ सवा पांच माह में बढ़ी। बीते दिनों खान विभाग की एसीएस अपर्णा अरोड़ा की इसे लेकर हुई बैठक में इंटीग्रेटेड सिस्टम विकसित होने के बाद रॉयल्टी में हुए फायदे के आंकड़े अफसरों ने रखे हैं।
प्रणाली के फायदे
- अवैध खनन एवं परिवहन पर कंट्रोल खनन माल में वजन में गड़बड़ी हुई तो ई-रवन्ना से तुरंत पकड़।
- रॉयल्टी राजस्व में बढ़ोतरी।
- वाहन पहचान, परिवहन डिजिटल होने से समय की बचत।
- वाहनों की निगरानी आसान।
- बेहतर प्रशासनिक कंट्रोल।

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