एसएमएस अस्पताल : बिलिंग काउंटर से ओपीडी तक इंतजार, कबाड़ में पड़े ऑक्सीजन सिलेंडर
अव्यवस्थाओं से जूझते मरीज-परिजन
जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी एसएमएस अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर में फैली अव्यवस्थाएं उनकी परेशानी बढ़ा रही हैं। बिलिंग काउंटर पर लंबी कतारें, ओपीडी में उमड़ती भीड़, गार्डों से मिलती अभद्रता, भीषण गर्मी में तपते टीन शेड के नीचे इंतजार करने की मजबूरी, कबाड़ के बीच पड़े ऑक्सीजन सिलेंडर और अव्यवस्थित पार्किंग अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
मरीज बोले- इलाज कम, परेशानी ज्यादा : दैनिक नवज्योति ने जब अस्पताल में व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो कई अव्यवस्थाओं से सामना हुआ। अस्पताल के बिलिंग काउंटर पर सुबह से ही मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लगी रहीं। बिलिंग और पर्ची बनवाने में घंटों का समय लगने से कई मरीजों का उपचार प्रभावित हुआ। छोटे बच्चों, बुजुगार्ें और गंभीर मरीजों के साथ आए परिजनों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। दौसा से आए मरीज के परिजन राकेश ने बताया कि भीषण गर्मी में यहां इलाज कराना किसी जंग लड़ने से कम नहीं है। ओपीडी में भी भीड़ के चलते अव्यवस्था का माहौल बना रहा। डॉक्टरों को दिखाने और जांचों के लिए लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
परिजन गर्मी में खुले में बैठने को मजबूर : पर्याप्त बैठने की व्यवस्था नहीं होने से कई मरीज फर्श, सीढि़यों और खुले स्थानों पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। बांगड़ परिसर के पास बने लोहे के टीन शेड में बैठे मरीज और उनके परिजन गर्मी से बेहाल नजर आए। धूप में तपते टीन शेड के नीचे उमस के बीच लोगों ने छायादार प्रतीक्षालय, पंखों, कूलर जैसी बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की मांग की।
जगह-जगह कबाड़, बेतरतीब खड़े वाहन : अस्पताल परिसर में जगह जगह कबाड़ बिखरा हुआ है। कबाड़ के बीच खुले में पड़े ऑक्सीजन सिलेंडर भी चिंता का विषय बने हुए हैं। जीवनरक्षक उपकरणों का इस तरह असुरक्षित अवस्था में रखा होना उनके रख-रखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। बांगड़ परिसर के बाहर बेतरतीब खड़े दोपहिया और चौपहिया वाहनों के कारण यातायात प्रभावित होता रहा। मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर लेकर निकलने में भी कठिनाई हुई।

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