देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष का पद कानूनी पेंच में फंसा

इस पद पर नियुक्त नदबई के विधायक जोगेन्द्र सिंह अवाना ने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है।

देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष का पद कानूनी पेंच में फंसा
अवाना को नौ फरवरी को नियुक्त किया गया था। उस दिन 44 निगमों, बोर्डों और आयोगों में 58 लोगों को राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थी। उनमें से अवाना को छोड़कर सभी लोगों ने कार्यभार संभाल लिया।

जयपुर। प्रदेश में देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष का पद कानूनी  पेंच में फंस गया है। इसके चलते इस पद पर नियुक्त नदबई के विधायक जोगेन्द्र सिंह अवाना ने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। अवाना को नौ फरवरी को नियुक्त किया गया था। उस दिन 44 निगमों, बोर्डों और आयोगों में 58 लोगों को राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थी। उनमें से अवाना को छोड़कर सभी लोगों ने कार्यभार संभाल लिया।

ये फंसा पेंच
चूंकि अवाना अभी विधायक है और राजस्थान देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष को केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। पहले इस पद को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था, किन्तु वसुंधरा राजे की सरकार ने गत 22 अगस्त, 2008 को इसका दर्जा बढ़ाकर केबिनेट स्तर का कर दिया था। इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव डॉ. मालोविका पवार की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी। इसी अधिसूचना में बोर्ड में अशंकालिक सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर चार की गई थी। चूंकि राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 30 से ज्यादा नहीं हो सकती है, जो इस समय पूरी है। अवाना भरतपुर जिले की नदबई विधानसभा सीट से विधायक है, अगर देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उनको केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाता है, तो उनकी विधायकी भी खतरे में पड़ती है। उच्चतम न्यायालय के आदेश की वजह से मुख्यमंत्री के छह सलाहकारों को भी मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा सका। ये सभी विधायक राजनीतिक सलाहकार है। अवाना ने राजस्थान विधानसभा का चुनावा बसपा के टिकट पर जीता था। बाद में बसपा के सभी छह विधायकों ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली।


निकाली जा रही है गली
अवाना को इस पद पर कार्यभार संभालने से पहले राज्य सरकार कोई न कोई रास्ता निकाल रही है। सूत्रों के अनुसार पूर्व की अधिसूचना में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन के बाद ही अवाना को कार्यभार संभलवाया जाएगा। अगर अधिसूचना में संशोधन नहीं हो पाता है तो किसी अन्य गैर विधायक को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और अवाना को अन्य महत्वपूर्ण पद से नवाजा जा सकता है।

मुझे जनता की सेवा करनी है। अभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कानूनी राय लेकर कोई न कोई रास्ता निकालने में लगे हुए हैं। जो भी होगा, वह कानूनी दायरे में ही किया जाएगा। -जोगेन्द्र सिंह अवाना, विधायक नदबई

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