कविताओं से रूठा वसंत : नहीं रहे वरिष्ठ कवि ऋतुराज, साहित्य जगत में शोक
भरतपुर में जन्में, चाइना रेडियो इंटरनेशनल को भी दी सेवाएं
जयपुर। हिंदी कविता में अग्रणी स्थान रखने वाले वरिष्ठ कवि ऋतुराज नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद सोमवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने आधुनिक हिंदी काव्य को कई अनुपम कृतियां दीं, जिनमें हम उत्तर मुक्तिबोध हैं, मैं आंगिरस, सुरत निरत, नहीं प्रबोधचंद्रोदय, कितना थोड़ा वक्त, अबेकस, एक मरणधर्मा और अन्य, लीला मुखारविंद, आशा नाम नदी, स्त्रीवग्ग आदि महत्वपूर्ण हैं। उनकी कुछ कविताएं, जिनमें कन्यादान, सेवाग्राम, जब हम नहीं रहेंगे आदि विभिन्न विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम के अंतर्गत पढ़ाई जाती रही हैं। स्त्री जीवन को केंद्र में रखकर उन्होंने कई महत्वपूर्ण कविताएं लिखीं, वहीं जंगल भी सहज रूप में उनकी कविताओं में चले आए। ऋतुराज का अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 12.30 बजे किया जाएगा।
भरतपुर में जन्में, चाइना रेडियो इंटरनेशनल को भी दी सेवाएं :
1940 में वसंत पंचमी के दिन भरतपुर में जन्मे ऋतुराज ने राजस्थान विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए किया, फिर लगभग 40 वर्ष तक राजस्थान के विभिन्न महाविद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ाई। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद चाइना रेडियो इंटरनेशनल के लिए बतौर भाषा विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दीं। चाइना प्रवास पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण किताब लिखी ‘चीन डायरी’, जो बदलते चीन को समझने में सहायक है। साहित्य और विशेषकर कविताओं के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले, जिनमें बिहारी पुरस्कार, मीरां पुरस्कार, पहल सम्मान, परिमल सम्मान, कन्हैयालाल सेठिया, घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार प्रमुख हैं।

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