डकैती के मामलों में आई गिरावट : 2026 में सिर्फ 28 डकैतियां, फिर भी बरामदगी में पिछड़ी पुलिस
आमजन की सतर्कता भी जरूरी
जयपुर। 2026 के पांच महीनों में प्रदेश में 28 डकैतियां हुईं, जो पिछले छह वषोंर् में इस अवधि में सबसे कम है। फिर भी लूटा गया माल बरामद करने में पुलिस विफल रही। वर्ष 2024, 2025 और 2026 (मई माह तक) में बरामदगी का प्रतिशत शून्य है। यानी अपराधी वारदात के बाद माल को तेजी से खपाने या दूसरे राज्यों में पहुंचाने में सफल रहे। जेवर, नकदी और अन्य सामान दूसरे राज्यों या अवैध बाजारों में खपा देते हैं।
ऐसे बदल गया डकैतों का तरीका
पहले रैकी कर घर में सशस्त्र घुसकर बंधक बनाते थे। अब कारों से पीछा करते हैं और सुनसान जगह लूट लेते हैं। नए घरों की छतें आजकल जुड़ी होती हैं तो एक से दूसरे और तीसरे में जाना आसान रहता है।
सोशल मीडिया से परिवार की गतिविधियों की जानकारी जुटाना।
सरकारी कर्मचारी या कम्पनियों के प्रतिनिधि बनकर रैकी कर लेते हैं।
नकली पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर प्रवेश करना।
हथियारों के बल पर परिवार को बंधक बनाकर वारदात को अंजाम देना।
डकैती रोकने के लिए पुलिस ने कई मोचोंर् पर कार्रवाई तेज की।
अंतरराज्यीय गिरोहों की निगरानी।
हाईवे और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त।
सीसीटीवी और तकनीकी सर्विलांस।
हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन।
रात में विशेष नाकाबंदी अभियान।
मुखबिर तंत्र को मजबूत करना।
आमजन की सतर्कता भी जरूरी
घर और प्रतिष्ठान में सीसीटीवी लगाएं।
सोशल मीडिया पर यात्रा या घर खाली होने की जानकारी साझा न करें।
बैंक से बड़ी राशि निकालने पर अकेले न जाएं।
संदिग्ध व्यक्ति या वाहन दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।
रात में सुनसान मागोंर् पर अकेले यात्रा से बचें।
राजस्थान में चर्चित गिरोह
बावरिया गिरोह: देश के सबसे कुख्यात अंतरराज्यीय डकैती गिरोहों में शामिल रहा है। इसके सदस्य कई राज्यों में हाईवे, फार्महाउस और मकानों में हथियारबंद डकैती की वारदातों में पकड़े गए।
चंबल गिरोह: पहले चंबल घाटी के सक्रिय गिरोह राजस्थान के धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और भरतपुर क्षेत्र में वारदात करते थे। इनमें जगराम,जगन गुर्जर, पप्पू गुर्जर और अन्य गिरोहों के नाम समय-समय पर पुलिस रिकॉर्ड में सामने आए।
रणनीति में बदलाव से आई कमी
2023 में डकैती के मामलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद पुलिस की रणनीति में बदलाव, लगातार निगरानी और सक्रिय अपराधियों पर कार्रवाई के चलते मामलों में गिरावट रही। 2026 में यह आंकड़ा छह वषोंर् के न्यूनतम स्तर पर रहा।

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