हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट की कार्यशैली पर उठाए सवाल, पीठासीन अधिकारी और रीडर्स को ट्रेनिंग की बताई जरूरत
आदेश की कॉपी रजिस्ट्रार जनरल के जरिए हाईकोर्ट के सीजे के समक्ष रखे
जयपुर । राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पीठासीन अधिकारियों और रीडर्स को न्यायिक कार्यवाही के बेहतर प्रबंधन के लिए उचित ट्रेनिंग देने की जरूरत है। साथ ही अदालत ने आदेश की कॉपी रजिस्ट्रार जनरल के जरिए हाईकोर्ट के सीजे के समक्ष रखने के लिए कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश रामस्वरूप की चौथी जमानत याचिका को मंजूर करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को न्याय की प्रतीक्षा में अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की ऑर्डरशीट रीडर द्वारा लिखे जाने और अंत में पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर करने की स्थिति सामने आई है। ऐसे में पीठासीन अधिकारियों और रीडर्स को उचित प्रशिक्षण देने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना चाहिए।
अदालत ने जब 19 सितंबर से 28 अक्टूबर 2026 तक की एसीजेएम की ऑर्डरशीट को देखा तो पाया कि उसमें कोई प्रगति नहीं हुई और न्यायिक हिरासत अवधि बढ़ाई जाती रही। जमानत याचिका में कहा कि आरोपी धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और षड्यंत्र के मामले में 12 मई 2025 से जेल में है। हाईकोर्ट के जल्द ट्रायल निर्देश के बाद भी कोर्ट में अभी तक केवल एक ही गवाह के बयान दर्ज हुए हैं।

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