जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल के दूसरे संस्करण का आगाज : पद्मनाभ सिंह के सहयोग से तैयार किया गया फेस्टिवल, कला, हस्तशिल्प, खानपान और संवाद की अनूठी श्रृंखला प्रस्तुत

दूसरे जयगढ़ हेरिटेज फ़ेस्टिवल 2025 की शानदार शुरुआत

जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल के दूसरे संस्करण का आगाज : पद्मनाभ सिंह के सहयोग से तैयार किया गया फेस्टिवल, कला, हस्तशिल्प, खानपान और संवाद की अनूठी श्रृंखला प्रस्तुत

जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल 2025 के पहले दिन की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विविध कला गतिविधियों के साथ हुई। उद्घाटन समारोह में पद्मनाभ सिंह और संजॉय के. रॉय ने विरासत संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। दिनभर नगाड़ा वर्कशॉप, मास्टरक्लास, संवाद सत्र और कला प्रदर्शनियां हुईं। शाम को पपॉन, कबीर कैफ़े और अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

जयपुर। बहुप्रतीक्षित जयगढ़ हेरिटेज फेस्टिवल का दूसरा संस्करण वर्ष 2025 में एक बार फिर राजस्थान की राजसी विरासत, जीवंत कला और सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर लेकर आ गया है। 6 दिसंबर 2025 को आयोजित पहले दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत सुभात निवास, लक्ष्मी विलास, खिलबती निवास और चारबाग़ में हुई।

सुबह की शुरुआत दागर आर्काइव्स म्यूज़ियम के सहयोग से हुल्लास पुरोहित की मनमोहक प्रस्तुति से हुई, जिसने दिन की शुरूआत में ही सांस्कृतिक उल्लास का वातावरण बना दिया। इसके पश्चात उद्घाटन समारोह तथा फ़ेस्टिवल कीनोट का आयोजन हुआ, जिसमें पद्मनाभ सिंह और टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजॉय के. रॉय ने उपस्थित दर्शकों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने राजस्थान की विरासत के संरक्षण के लिए कलात्मक अभिव्यक्ति, समुदाय के सहयोग और पीढ़ियों से चली आ रही कहानियों को आगे बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने उन सभी सहयोगियों, कारीगरों और कलाकारों का आभार व्यक्त किया, जो इस महोत्सव को रचते हैं।

दोपहर के सत्र विविध विषयों और कलाओं को समर्पित थे। इनमें नाथूलाल सोलंकी द्वारा नगाड़ा वर्कशॉप, जाइल्स टिलॉटसन की मास्टरक्लास, स्पोर्टिंग द क्राउन – रॉयल्टी इन द इंडियन गेम, जिसमें महाराजा समरजीतसिंह गायकवाड़ ने अमृत माथुर के साथ संवाद किया, ढोला मारू आर्ट गैलरी द्वारा मिनिएचर पेंटिंग मास्टरक्लास और द लिविंग वेल्स ऑफ राजस्थान-अनु मृदुल, प्रो. राजेंद्र सिंह खंगरोट और देबसिश चक्रवर्ती की अमित पासरिचा के साथ रोचक बातचीत शामिल थी।

दिन का समापन वेदांता चारबाग़ में ऊर्जावान और विविध संगीत प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिनमें श्योपत जुलिया की मशक, द अनिरुद्ध वर्मा कलेक्टिव, कबीर कैफ़े और शानदार समापन प्रस्तुति पपॉन लाइव शामिल थे। इस प्रकार फ़ेस्टिवल के पहले दिन ने दर्शकों को सांस्कृतिक विविधता, कला और विरासत का एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान किया।

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