विधानसभा से गांव की चौपाल तक : पंचायत चुनाव में उतरे सियासत के ये दिग्गज, पढ़े पूरी खबर
देवेंद्र कटारा: फिर ग्रामीण राजनीति में सक्रिय
जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव इस बार कई मायनों में खास होने जा रहे हैं। गांवों की सरकार के चुनावी रण में अब ऐसे दिग्गज भी उतर आए हैं, जो कभी विधानसभा में जनता की आवाज बन चुके हैं और सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों के जिला परिषद सदस्य बनने की दौड़ में शामिल होने से स्थानीय चुनावों का सियासी तापमान बढ़ गया है। बाड़मेर से डूंगरपुर तक कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
गफूर अहमद: बाड़मेर में कांग्रेस का अनुभवी चेहरे पर दांव
बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड संख्या 15 से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री गफूर अहमद को उम्मीदवार बनाया है। अहमद बाड़मेर की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे पूर्व विधायक अब्दुल हादी के पुत्र हैं और राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा वे बाड़मेर जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी रह चुके हैं। चौहटन विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1998 में विधायक चुने जा चुके गफूर अहमद का जिला परिषद चुनाव में उतरना कांग्रेस की ग्रामीण राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उनके राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में पुराने संपर्कों के बीच इस सीट के मुकाबले पर सबकी नजर रहेगी। उनके सामने चुनौती अपने पुराने जनाधार को जिला परिषद चुनाव में वोटों में बदलने की होगी।
पूंजीलाल परमार: डूंगरपुर में कांग्रेस का आदिवासी चेहरा मैदान में
डूंगरपुर जिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक पूंजीलाल परमार ने भी पंचायत चुनाव में ताल ठोक दी है। पार्टी ने उन्हें जिला परिषद के वार्ड संख्या 34 पुनाली से मैदान में उतारा है। वे 2006 में डूंगरपुर की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर विधायक बने थे। आदिवासी बहुल क्षेत्र की राजनीति में अनुभव रखने वाले परमार का जिला परिषद चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा तक पहुंच चुके नेता का स्थानीय निकाय के चुनाव में उतरना यह भी दिखाता है कि पंचायत स्तर पर राजनीतिक पकड़ बनाए रखना दलों के लिए कितना अहम है।
अनीता कटारा: भाजपा ने महिला नेतृत्व पर जताया भरोसा
भाजपा ने डूंगरपुर जिले के वार्ड संख्या 21, भीलूड़ा से पूर्व विधायक अनीता कटारा को प्रत्याशी बनाया है। अनीता कटारा पूर्व सांसद कनकमल कटारा की पुत्रवधू हैं और सागवाड़ा क्षेत्र की राजनीति में प्रमुख पहचान रखती हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को महज 640 वोटों के अंतर से हराया था। इस जीत ने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में पहचान दिलाई। अब जिला परिषद चुनाव में उनकी राजनीतिक सक्रियता और पुराना चुनावी अनुभव भाजपा के लिए अहम साबित हो सकता है।
देवेंद्र कटारा: फिर ग्रामीण राजनीति में सक्रिय
डूंगरपुर के पूर्व भाजपा विधायक देवेंद्र कटारा ने जिला परिषद के वार्ड संख्या 6, वेड से नामांकन दाखिल किया है। पेशे से वकील कटारा 2013 में डूंगरपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को 3,845 वोटों से हराया था। राजनीतिक सफर के दौरान वे आम आदमी पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अब जिला परिषद चुनाव के जरिए वे एक बार फिर स्थानीय राजनीति में अपनी ताकत आजमाने जा रहे हैं। उनके चुनाव मैदान में आने से इस वार्ड का मुकाबला भी चर्चा में है।

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